Alehouse Poetry – इतना भी ना रोको मुझे – Ghazal Poem

Alehouse Poetry – Ghazal Poem

Alehouse Poetry

इतना भी ना रोको मुझे मैखानों से,
आज तो हंगामा है दिल में यारों,
जरा बुझ लेने दो एक आध पैमानों से।

मैं कहा पीता हूँ शराब यूँही बदनाम हूँ,
जिंदगी से पि है अब तक उतरी नही,
चला जाता हूँ बस यूँही मैखाने कि और,
जहर दिल तक छाया है कुछ उतार आता हूँ।

लोग बोले जहर है शराब मत पीना,
लोगों से पूछो ज़माने ने पिलाई क्या था,
लोग बोले आदत है शराब मत पीना,
लोगों से पूछो जो उन्होंने लगाई क्या था।

शहर घर दरवाजे तक बंद है मेरे,
कोई पीछे से टोके कोई ना है मेरे,
एक मैखाने बाहें खुले रखते है,
दवा तो नही पर दारु तो पिलाते है।

लड़खड़ाते कदम आशियाँ पूछता है मेरा,
नज़रे दूर दूर तक वजूद पूछता है मेरा,
क्या बोलू के अब तो कब्र कि ठिकाना नही,
एक मैखाना और एक साक़ी बस और कोई नही।

इतना भी ना रोको मुझे मैखानों से,
आज तो हंगामा है दिल में यारों,
जरा बुझ लेने दो एक आध पैमानों से।

Read more:

Add a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Pin It on Pinterest