Author: Kavi Devendar Pratap Singh

New Year Resolution Poem – ओ अर्द्धरात्रि – Resolution Poem

New Year Resolution Poem – Resolution Poem New Year Resolution Poem ओ अर्द्धरात्रि के उल्लू सुन, अब जाग भोर हो गई नई.. असली उत्सव आया है अब नव संवत्सर है,वर्ष नई। बगिया महकी,चिड़िया चहकी, कुदरत ने बाँहें फैलाई. बासंती के आलिंगन को, बेला बैसाखी की आई। भीनी खुशबू बागों में है, कोयलिया गीत सुनातीं है..

Uttar Pradesh Election – समतल देखो – Poem About Election

Uttar Pradesh Election – Poem About Election Uttar Pradesh Election समतल देखो, देखो पहाड़ हाथी करता भीषण चिंघाड़ आँधी भगवा की आयी है सबके झंडे डाले उखाड़ जो कहते कमल हुआ है झाड़ उन सबको डाला है पछाड़ पंजे को तोड़ मरोड़ दिया साइकिल भी कर दी है कबाड़ वो बना रहे थे तिल का

Raise Your Voice – जब सबके हाथों का – Poem About Youth Today

Raise Your Voice – Poem About Youth Today Raise Your Voice जब सबके हाथों का गुलाब इक दम से ख़ंज़र हो जाए हरियाली पावन पुण्य धरा इक दम से बंजर हो जाए जब इन्द्रासन का अहंकार मदमस्त रहे ऊँचाई में  कुदरत के कारिन्दे डूबें कायरता की गहराई में तब सुनो कर्ण को धनुष बाण तलवार

Emotions Poem – कौन समझा इस जहाँ में – Poem on Writing

Emotions Poem – Poem on Writing Emotions Poem कौन समझा इस जहाँ में लेखनी के दर्द को चाहे समझाने में ही कितने ज़माने लग गए आज दिनकर और दुष्यन्तो की बातें किस में हैं हैं अगर दो चार तो वो भी ठिकाने लग गए लोग बहरे हो गए हैं चीख कोई ना सुने फ़िर भी

Society Poem – तुमने किया कटाक्ष कृष्ण – Humanity Poem

Society Poem – Humanity Poem Society Poem तुमने किया कटाक्ष कृष्ण पर अपने तुच्छ इशारों में क्या ऐसा ही लिक्खा है तुमने स्वराज के नारों में शौर्य सभ्यता संस्कृतियों को भी स्वराज से दूर किया मंशा क्या है इस स्वराज की ? चर्चा पर मजबूर किया ये कुनबा तो दुष्कर्मों पर आँख मूंदकर सोता है

Life Struggles Poem – जख्म देकर यह – Journey of Life Poem

Life Struggles Poem – Journey of Life Poem Life Struggles Poem जख्म देकर यह ज़माना मुस्कराता जाएगा दर्द कितना भी कहो यह गुनगुनाता जाएगा जिंदगी तो एक दीपक की तरह है दोस्तो आँधियों में ये बुझे या फड़फड़ाता जाएगा कुछ बनोगे तो ज़माने को सुहाओगे नहीँ कुछ न बन पाए तो बस ताने सुनाता जाएगा

Sacrifice Poem – उस दिन था पूरे भारत मे – Poem on Soldiers

Sacrifice Poem – Poem on Soldiers Sacrifice Poem उस दिन था पूरे भारत में त्यौहार रंगो की होली का, सरहद पर तात उसी दिन हो बैठे शिकार थे गोली का, रंगो की थी बौछार हमारे घर की हर दीवारी पर, छोटे भाई लड़ रोते थे रंगो की मारामारी पर, गलियों में फगुनी गीतों की मधुरिम

Ghazal – दंगल चुनाव के – Funny Poem on Politics in Hindi

Ghazal – Funny Poem on Politics in Hindi Ghazal दंगल चुनाव के यहाँ आखेट हो गए, पचता नहीँ विकास ऐसे पेट हो गए, कैसे कहें शिक्षित बनेगा यह प्रदेश जी, नेता भी जो थे सभ्य आज़ ठेठ हो गए, कल ही गए थे संग रैलियों में जो वहाँ, कट जो गई टिकट तो डॉग-कैट हो

Republic Day Poem in Hindi – मुझको नयी उमंग – Hindi Poem

Republic Day Poem in Hindi – Hindi Poem Republic Day Poem in Hindi आज सुबह आँखें खोलीं तो मुझको नयी उमंग दिखी, सबके सर पे हावी होती देशप्रेम की भंग दिखी, बच्चे बूढे और जवानों के तेवर उन्मांदी थे, आज़ वतन की खातिर जान लुटाने के भी आदी थे, शहर मुहल्ले गाँव गली में सबके

Respect Women Poem – फीते से जो नाप रहा था – Poem on Anger

Respect Women Poem – Poem on Anger Respect Women Poem फीते से जो नाप रहा था नारी की कद काठी को, तुष्टिकरण में बेंच दिया है जिसने अपनी माटी को, जिसने चोरों के संग में अपनी बारात सजाई है, शायद कई दरिंदों की भी जिसने प्यास बुझाई है, वह बुड्ढा आवाज़ मिलाता है कैसे सुर

Suffering Poem – कब तक घाटी के असुरों को – Poem on Pain

Suffering Poem – Poem on Pain Suffering Poem कब तक यूँ श्वेत कपोतों की बिरियानी उन्हें खिलाओगे कब तक घाटी के असुरों को वीरों का रक्त पिलाओगे कब तक नापाक पडोसी की साजिश में फ़ंसते जाओगे  कब तक समझौतों को कर शहादतों पर हँसते जाओगे अलगाववाद आतंकवाद को अलग-अलग मत तौलो जी वो भी तो

Indian Child Poem – सौभाग्यशाली – Short Poem on Courage

Indian Child Poem – Short Poem on Courage Indian Child Poem थे सौभाग्यशाली पन्ना पुत्र जैसे नवजात चाहे अनजाने में ही प्राण छिनते रहे शत्रुओं ने कभी भी डिगा पाया न स्वाभिमान  चाहे मिलके हजारों जाल बिनते रहे धर्म से टले नहीँ थे जोरावर फ़ते सिंह चाहे शत्रु जिन्दा दीवारों में चिनते रहे सिंहनी के

Stone Pelters – कुत्तों के आगे सिंहों – Poem on Anger

Stone Pelters – Poem on Anger in Hindi Stone Pelters कुत्तों के आगे सिंहों की बोटी फैकी जाती है तुष्टिकरण में सिर्फ सियासी रोटी सेकी जाती है पत्थरबाजों की टोली जब उस पर टूट पड़ी होगी तब सैनिक ने संविधान पर कैसे धीर धरी होगी लो मैं तिरस्कार करता उन अनुच्छेद, धाराओं का  रक्त जिन्होंने

Country Poem in Hindi – देश नहीँ अंधा है – Poem on Pain

Country Poem in Hindi – Poem on Pain in Hindi Country Poem in Hindi देश नहीँ अंधा है देख रहा है सबकी चालों को दुश्मन के हाथों घायल होते भारत के गालों को देश नहीँ अंधा है समझ रहा जेहादी चाहत को हत्यारों के हित में होती नित-नित नयी वकालत को देश नहीँ अंधा है

Deaf Poem – सरदारो बहरे हो क्या – Poem on Anger in Hindi

Deaf Poem – Poem on Anger in Hindi Deaf Poem सरदारो बहरे हो क्या ?भाषा समझो मौलानाअों की तस्वीरें आज़ दिखा डाली अपनी-अपनी मंशाअों की घाटी के पत्थरबाजों के पहरेदारों के नारों में इक ही सुर ताल मिली हमको बाकी सारे गद्दारों में जिस थाली में खाते आए उस पर आघातेें करते हैं  ये टुकडों

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