Author: Monika Yadav

Betiyan Poem – Poem on Daughters in Hindi- मैं इस समाज को

Betiyan Poem – Hindi Poem on Betiyan Betiyan Poem मैं इस समाज को समझ नहीं पाई, मां-बाप के घर में सुना बेटी कि है पराई, डोली में तुम जाना, हमारा मान बढ़ाना, बिना बुलाए मायके में मत आना, कभी पीहर पर मत इतराना, उस घर में डोली में जाना, अर्थी पे वापस आना| मैं इस

Wife – Poem on Wife in Hindi – पत्नी की दशा – Poem on Women

Poem on Wife in Hindi Wife वह सुबह, 5 बजे उठ जाती है, निस्वार्थ भावना से, काम मे लग जाती है, अपने सास ससुर का, और अपने बच्चों का, अपने पति का, ख्याल रखती है, सुबह के नाश्ते, से लेकर, रात के खाने तक, वह भागती रहती है, सास पुकारती है, बहु मेरी चाय, बच्चे

Hindi Kavita – सच है औरत अपने लिए कभी – Women Poetry

Hindi Kavita on Nari – Women Poetry Hindi Kavita सच है औरत अपने लिए कभी नहीं जीती है, रातभर पूरी नींद नहीं ले पाती है, थोड़ा थोड़ा जागती है, दरवाजों की कुंडियां, बच्चों की चादर, पति का मन, टटोलती रहतीं हैं, जब जागती है तब पूरा नहीं जागती हैं, नींद में ही भागती हैं, कभी

Safety Rules – Funny Poem on Husband in Hindi – रोड सेफ्टी रूल

Safety Rules – Funny Poem Safety Rules हमने पतिदेव से रोड सेफ्टी रूल, निभाने का वादा क्या लिया! पतिदेव ने हमें ही रोड सेफ्टी के, नियम समझाते हुए हेलमेल थमा दिया! हमने कहा-अरे वाह! कबसे हलमेट मंगवा रहे हैं, तब तो नहीं आया, आज बिन मांगे ही ला दिया, कहने लगे पतिदेव – जिस तरह

माँ – Poem on Mother in Hindi – Poem on Mother Love

माँ – Poem on Mother in Hindi माँ किसी की भी नजरों में मां का, प्यार नजर नहींआता है, मां की लोरी सुनने वालो मां का, दर्द ए हाल नजर नहींआता है, अपने आंसु बचा कर रखना गमों का, तूफान कहकर नहीं आता है, इतने कठोर मत बनो गुजरा लम्हा, लौट कर नहीं आता है,

Funny Poem – पतियों को पता नहीं क्या हो गया

Funny Poem on Husband in Hindi Funny Poem आज कल के पतियों को पता नहीं क्या हो गया, पत्नियों की तारीफ करे जमाना हो गया, पत्नी बेझिझक पति की तारीफ के बांधे पुल, फिर भी पति को लगती है मानो शूल, खुद तो तारीफ करते नहीं, पत्नी करे तो बर्दाश्त नहीं, बिन बात के चिढ़

पुरानी यादें – Memories Poem – Poem on Life in Hindi

पुरानी यादें – Memories Poem पुरानी यादें, वो भी क्या दिन थे, न कोई चिंता, न कोई फ़िक्र थी, अपनी ही मस्ती में, हम मशगूल थे, न घर परिवार की, न क़ुदरत की मार की, कोई फ़िक्र हमको न सालती, अपनी मस्ती में, हम मगरूर थे, ऩ कोई अमीर था, न कोई गरीब था, अपने

Indian Culture in Hindi – घूंघट – Short Poem on Indian Culture

Short Poem on Indian Culture Indian Culture बाजार गई थी पति के साथ, तब मैने देखी अद्भुत बात, सामने से एक आई स्कूटी, चला रही थी नारी घूंघट में बैठी, नारी चाहे जितनी आगे बढ़ी, अभी भी है घूंघट में फंसी, वह क्यों है इतनी नादान, क्या घूंघट ही है हरियाणा की शान?

Humanity Short Poem – जब चाँद का ही कोई मजहब नहीं है

Humanity Short Poem Humanity जब चाँद का ही कोई मजहब नहीं है तो इंसां क्यूँ लड़ता है म़जहब के लिए वही चाँद ईद का है वही चाँद करवा चौथका है फिर इंसान क्यूँ मचलता है मज़हब के लिए

Husband Wife Poem – पति पत्नी – Husband Wife Relation Poem

Husband Wife Relation Poem Husband Wife Poem ये कैसा अजीब रिश्ता है, जिसे पहले कभी देखा नहीं, जाना नहीं पहचाना नहीं, जब सारी जिन्द्की एक दूसरे के साथ, डाल हाथो में हाथ, धीरे धीरे होने वाला स्पर्श, फिर सुरु हो जाती है मीठी मीठी नोकझोक, कभी बोल चल बंद …  

Women Poetry – Poem About Feminism – मेरा वजूद क्या है

Poem About Women Women Poetry मेरा वजूद क्या है मैं खुद नहीं जानती मैंने जो सहा है दुनिया नहीं जानती पैदा होने से पहले क्यूँ मार दिया गया मुझे जरा भी दर्द नहीं हुआ बताओ मां क्या तुझे पैदा हो भी गई कहीं मैं भूल से सताया गया मुझे हर मोड़ पर शूल से मुझे

Feminism – स्त्री पुरूष दोनों – Hindi Poetry – Women Poetry

Feminism Feminism स्त्री पुरूष दोनों हैं इस संसार का आधार फिर क्यों समझा जाता है सिर्फ नारी को बेकार उसे ही अपमानित किया जिसने सब पर लुटाया प्यार मात पिता ने भी कर दिया पराई सास ने भी कह दिया पराये घर से आई सबसे मैंने बहुत ही गाली खाई अंदर ही घुट घुटके रोई

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