Author: Ramji Verma

Hungry Poem – भुखमरी को श्रद्धांजलि – Hindi Poem on Life

Hungry Poem – Hindi Poem on Life Hungry Poem भूख के समीकरण की बिछी हुई बिसात है, शतरंज के इस खेल में बस शह और मात है. मौत के मुआवज़े भी हैं मौत के इनाम भी, मौत की सियासत में मौत के कोहराम भी, चारो तरफ फैला हुआ मौत का व्यापार यहाँ, मौत को मिलती

Festival Poem in Hindi – दीपावली – Deepawali Poem

Festival Poem in Hindi – Poem on Deepawali in Hindi Festival Poem in Hindi संवेदनाएं अभी कितनी, संत्रास में पड़ी हैं, अनुभूतियाँ भी कितनी, वनवास में पड़ी हैं, जीतना ही होगा हमें, अंदर के दशानन को, साथ लेकर युद्ध में, निष्ठा के लक्षमन को, प्रेम की गंगा सदा ही, ह्रदय में उमड़ी रहे, हर तरफ

Stranger Poem – अजनबी मुलाकात करें – Love Poetry

Stranger Poem – Love Poetry Stranger Poem आओ प्रिये ठहरे समय में, कुछ नए ज़ज़्बात भरें, आओ सफ़र के हम सफ़र, इक अजनबी मुलाकात करें, परिचय के अंधेरों में, पहचान सिसकने लगी है, शब्द के संवेदना की दीवार धसकने लगी है, कड़वाहटों की ज़मीं पर, नागफनी उगने लगी, धैर्य की मजबूरियाँ भी, मतलब परस्त लगने

Hindi Kavita on Nari – कविता में स्त्री – 1 – Hindi Poem on Women

Hindi Kavita on Nari – Hindi Poem on Women Hindi Kavita on Nari उसकी लहराती ज़ुल्फ़ों से कविता में बहारें आती हैं या फिर, उमड़ घुमड़ कर फिजाँ में घटायें छाती हैं उसकी मुस्कान से कविता में उम्मीद के बादल उमड़ते हैं उसकी तिरछी चितवन भी कविता में बिजलियाँ गिराती है तुम्हारी कविता के प्रवाह

If Only Poem – काश – Poem on Hope in Hindi

If Only Poem – Poem on Hope in Hindi If Only Poem दो और दो का जमा चार, हर लम्हा हासिल करता सफर शुरू गर साथ हमारे पाँव तुम्हारा मिल करता मौजों की भी साँस सलामत पहुँच किनारे पर रहती बाहें फैला कर लहरों का, स्वागत गर साहिल करता कुछ लम्हे जीने की शायद हम

Poem on Gandhiji in Hindi – गांधीगीरी – Gandhigiri Poem

Poem on Gandhiji in Hindi – Gandhigiri Poem Poem on Gandhiji in Hindi बापू, तुम्हारी दृष्टि सियासत के लिए ख़तरा है इसीलिये, निज़ाम की साज़िशों ने तुम्हारी आँखों से सच्चाई का ऐनक उतार कर सज़ा दिया स्वच्छता के सिर पर वैसे भी साज़िशें, सत्य नहीं सम्भावना तलाश करती हैं अहिंसा के यात्रा की लाठी बाँध

Hindi Kavi and Kavita – कवि और कविता – Poem on Writing

Hindi Kavi and Kavita – Poem on Writing Hindi Kavi and Kavita कवि तुम्हारी कविता बहुत उदास है अपनी कविता के शब्द जाल से अपेक्षाओं का आखेट मत करो स्वार्थ और शब्दों की ज़ुगलबन्दी के जूठन से कविता का पेट मत भरो अनर्थ के इस दौर में तुम्हारे औचित्य की तरह तुम्हारी कविता के भी

Anarchy Poem – अराजक समय – Poetry on Time

Anarchy Poem – Poetry on Time Anarchy Poem आख़िर क्यों कुछ भी फ़र्क नही पड़ता सत्य की अभिशप्त कातरता से झूठ की निडर ततपरता से आँखों का स्थाई ख़ौफ चेहरों पर हताशा की लकीर खींचने लगा है संवेदनाओं का आत्म केंद्रित ठहरा जल वीभत्स निरपेक्षता की फसल सींचने लगा है. अवरुद्ध इंसानियत के इस दौर

Funny Poem in Hindi – नोट बन्दी के ज़ुमले – Poem on Joy in Hindi

Funny Poem in Hindi – Poem on Joy in Hindi Funny Poem in Hindi नोट बन्दी की कब्र पर आओ चढ़ा दें तोड़ कर उम्मीद के बेबस फूलों को  निज़ाम का निरुत्तर बड़बोलापन बदलने लगा है अपने बयान की चूलों को आँकड़ों की आँच में सच का कड़वापन आईने से रूबरू हो रहा है सकल

Gratitude Poem – नमन उन चिनगारियों को – Poem in Hindi Language

Gratitude Poem – Poem in Hindi Language Gratitude Poem ज़िल्लतों का बोझ सिर पर उठाये स्वाभिमान था संघर्षरत उनका अदम्य साहस, खतरे में भी रहा अडिग, अनवरत नारियाँ उस खौफ़ से निरन्तर टक्कर लेती रहीं जिसके समक्ष सत्ता भी साष्टांग दंडवत करती रही अध्यात्म की अराजकता, व्यभिचार की नालियों में, निरन्तर बहती रही सन्नाटे थे

Poem on Triple Talaq – तीन तलाक़ – Triple Talaq

Poem on Triple Talaq – Triple Talaq Poem on Triple Talaq देश भी यही था अदालत भी यही थी बस आधी आबादी के पाले में  सायरा बानो की हिम्मत नही थी सारा श्रेय इस ख़ातून को उसने साहस से अपनी बात कही सलाम उसके ज़ज़्बे को जो हक़ की ख़ातिर अड़ी रही उसने अधिनायकत्व के

Rape Poem – अबोध बेबसी – Poem on Rape Victim in Hindi

Rape Poem  – Poem on Rape Victim in Hindi Rape Poem उस पल, कामुकता ने वीभत्सता के बहाने गढ़े होंगे उस पल, मासूमियत को मसलने उसके हाथ आगे बढ़े होंगे उस पल, संस्कारों के आँसू बह कर बर्बरता की भेंट चढ़े होंगे उस पल, बचपन बिखरा होगा बदहवास होकर उस पल, मायूसियां मरी होगी निःस्वांस

Poem About Time – और फिर – Poetry on Time Passing

Poem About Time – Poetry on Time Passing Poem About Time फिर टल जाएगा संकट फिर बैठेगा, आयोग फिर होगी, निष्पक्ष जाँच फिर बुझ जाएगी विरोध की आँच फिर सफ़ेद होंगे, कुछ स्याह पन्ने फिर खोजे जाएँगे, बलि के बकरे फिर तय होंगे मछलियों के अपराध, मगरमच्छों के विरुद्ध फिर षड्यंत्र हो जाएगा, दुर्घटना सिद्ध

Poem on Relationship in Hindi – तलाश – Relationship Poem

Poem on Relationship in Hindi – Relationship Poem Poem on Relationship in Hindi न मजबूरियाँ मज़बूरी थीं ना ज़रूरतें ही ज़रूरी थीं उस अनाम रिश्ते में कभी रह पायी न कोई दूरी थी न अधिकार को था सहना ना कर्तव्य को था कहना लगता था बोल कर भी हर बार चुप सा रहना वो गालियाँ

Poem on Question – आख़िर क्यूँ? – Question Poem

Poem on Question – Question Poem Poem on Question दिल की बातें अक्सर अब बे मानी क्यूँ लगती हैं तुम को मेरे मन की बातें मनमानी क्यूँ लगती हैं जब जब कहना होता है तब तो तुम कुछ कहते हो  लेकिन जब चुप रहना हो तब भी तो कह जाते हो पर जायज़ हो जब

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