Author: Soumendra Sarkar

Habit Poem – आदत है उसकी – Poem on Human and Nature

Habit Poem – Poem on Human and Nature Habit Poem आदत है उसकी, बार बार टोकना हर बात पर, और मेरी, ना सुनते हुए सुन लेना. अब तो आँखों से भी सुन लेता हूँ, बीस साल हो गए कभी दहलीज़ नहीं लाँघि, जहन के तह तक घुल चुकी है वो. सुबह से शाम , शाम

Umeed Poetry – उम्मीद – Poem on Hope and Faith

Umeed Poetry – Poem on Hope and Faith Umeed Poetry जब किसिपे कोई उम्मीद करना, हाथ से दिल अपना संभाले रखना, टूटता है जो हज़ार टुकड़ो में, हर एक टुकड़े का तुम हिसाब रखना, जब किसिपे कोई उम्मीद करना. जब किसी हसीं चेहरे से भरोसा करना, अपने दामन में आंसू कुछ छुपाये रखना, बिखरता है

Inscrutable Poem – बोधहीन – Humanity Poem in Hindi

Inscrutable Poem – Humanity Poem in Hindi Inscrutable Poem मैं तो बोधहीन एक साधारण मनुस्य हूँ, तू तो संन्यासी है, तू क्यों स्वर्ग के लिए लालाइत है. मैं तो जर्जरित हूँ, लोभ काम क्रोध मोह माया से, तू तो संन्यासी है, तू क्यों इस संसार में मोहित है. मैं ईर्षा अग्नि में जल रहा हूँ,

Today Poem – आज भी है – Poem on Hope in Hindi

Today Poem – Poem on Hope in Hindi Today Poem कभी तो फिर से बीस को पहुँचूँगा, तेरी हंसी की खनक आज भी है, कभी तो फिर से दिल को जियूँगा, तेरी धड़कनो की स्वाद आज भी है. ए वक़्त तुझे घमंड किस बात पे है, मुझे उसका इंतजार तो आज भी है, मेरी झुर्रियों

Moments Poem – बीती लम्हों पर अब ऐतबार – Ghazal Poem

Moments Poem – Ghazal Poem Moments Poem कितनी हसरते बहाना ढूढती है, नींद टूट जाये फिर भी ख्वाब बुनती है. कितने अरमानों के महल बनते बिगड़ ते है, फिर भी उम्मीदों के सितारे जलते है. कोई कैसे सुबह को इलज़ाम दे पाए, रात के जले ख्वाब तो येही खिलते है. बीती लम्हों पर अब ऐतबार

Sawan Poetry – सावन का महिना चार – Ghazal Poem About Love

Sawan Poetry – Ghazal Poem About Love Sawan Poetry सावन का महिना चार यहाँ, आती नही क्यों बार बार यहाँ, गीली तकिये नींद भिगोये, सूखे दिल मेरा यार यहाँ, आती नही क्यों बार बार यहाँ. सावन का महिना चार यहाँ…. ऐसे तो आँखों में रहती, जाने ये कौन से बादल सहती, रिश्ता पुराना लगता है

Dil Ki Baat Poetry – दिल की बात है मेरी मर्ज़ी – Ghazal Poem

Dil Ki Baat Poetry – Ghazal Poem Dil Ki Baat Poetry दिल की बात है मेरी मर्ज़ी तो नही चलती, एहसान इतना करदे , के धडकनों की भी सुन लेना…. लोगों का क्या है, आँखों पे मुकद्दमे चलाएंगे, हमने तो पिली जिन्दगी इनसे, जमाना कहेंगे तो क्या, तू उनका मत सुन ना…… बेसबब इलज़ाम लगा

Ghazal Poem About Love – शाम ढले जब – Ghazal Poem in Hindi

Ghazal Poem About Love – Ghazal Poem in Hindi Ghazal Poem About Love शाम ढले जब चाँद चुपके से बोले आना मेरे गली ओ बाँके आना मेरे गली। रात बरे जब तारें चुपके से बोले आ खेलेंगे आँखमिचोली ओ बाँके खेलेंगे आँखमिचोली। देख के पिया बोले साजना आ चल आसमां तले चाँद बस रात भर

Do Not Poem – ना जाना यूँ खामोश रहके – Ghazal Poem

Do Not Poem – Ghazal Poem Do Not Poem ना  जाना यूँ खामोश रहके अलबिदा तो कह के जा रह गए जो अधूरे सपने कल के वादा करके जा। ना जाना यूँ…। तेरे बिन लम्हों का एहसान होगा तेरे आने तक ना रुके कभी, तेरे बिन ये साँसे क़र्ज़ होगा तेरे आने तक ना थमे

Book Poem – खुली किताब हूँ – Ghazal Poem

Book Poem – Ghazal Poem Book Poem खुली किताब हूँ कुछ पन्नो पर यूँ एतबार ना कर कहानी अब भी बाकी है यार और कुछ आगे तो पड़। कुछ रौशनी कम है सच्चाई नही अँधेरे में झूट कहा सच बोलती है !! ये रात फीकी पर जाने दे धुप की सच मीठी होती है… ना

Laal Rang Poem – किसके दामन लाल रंग सना – Poem on Behavior

Laal Rang Poem – Poem on Behavior Laal Rang Poem किस किसके दामन लाल रंग सना है, धो लेना नदी में गर पुण्य कमा है, कोई पूछेगा तो कह देना, ये रंग ही है बर चड़ बोला है। हाथ उठाके खुदको दिखाना, वहा रंग नही आइना दिखेगा, तुमसे कुछ सवाल भी पूछेगा, उन सवालो पे

Aaina Poetry – अब घर से सारे आईने मैंने निकाल – Ghazal Poem

Aaina Poetry – Ghazal Poem Aaina Poetry अब घर से सारे आईने मैंने निकाल दिए तन्हा हूँ तनहा रहू ख्वाहिसे निकाल दिए. अब घर से… खिड़की बहुत थे घर में सारे बंद कर लिए रौशनी से नाता तोड़ ली अँधेरे में बह लिए.. अब घर से… खामोश घर दीवारे अब खुद को सह लिए आवाजे

Voice Poem – दूर कही कोई आहट निकले – Memories Poem

Voice Poem – Memories Poem Voice Poem दूर कही कोई आहट निकले, लगता मुझे जानी पहचानी। दस्तक देके पुरवाई जो निकले, लगता मुझे वोही बात पुरानी। बारिश की वो भीनी सी खुसबू, बादल शराबी झूमती गाती। एक छतरी में दो दिल धड़कती, याद आती वो गुजरी कहानी। आज भी जब जब शाम ढलती है, चाँद

Water Poem – पानी का रंग नीला परा है – Ghazal Poem in Hindi

Water Poem – Ghazal Poem in Hindi Water Poem पानी का रंग नीला परा है, जहर ये नीला कम लगता है, अब किसको कोसु कौन गबाह है, ये प्यास पुराना आच्छा लगता है। पानी का रंग…… उची मंजिल पत्थर के सड़के, हरियाली अब फीका लगता है, दिन लम्बी है रात छोटी अब, गुजरा कल कहानी

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