Bay Poem – बंगाल कि खाड़ी तो नमकीन – Bay of Bengal

Bay Poem – Bay of Bengal

Bay Poem

बंगाल कि खाड़ी तो नमकीन बहुत,
पर उसकी दिल कि बोली मीठी शहद।

अंग्रेज़ो के नज़र में थी हो रानी,
जली थी आग से ये बंगाल कि पानी।

हो गए थे रख कितने अरमां,
कितने कोख के टूटे थे सपना।

पर दिलों में ख्वाब लोहे के थे,
और बाजुओं में हिमाकत शोले के थे।

ना टूटे ना झुके अंग्रेज़ो से,
बिद्रोहो के आग बनकर देश में फैले से थे।

इस जमीं कि बोली फिर भी प्यार उगले है,
हर आनेवाले को अतिथि भगवान बोले है।

बिद्यासागर गुरुदेब कि ये पबित्र जमीं,
बरी मीठी बोली इसकी ना कोई कमी।

नमन है मेरा हर बंगालन माँ को,
संतान को सिखाये मीठी बोली ये।

बंगाल कि खाड़ी तो नमकीन बहुत,
पर उसकी दिल कि बोली मीठी शहद।

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