Beauty Woman Poem – तुम्हारे हुस्न की दौलत – Hindi Poem

Beauty Woman Poem – Hindi Poem

Beauty Woman Poem

तुम्हारे हुस्न की दौलत,
सनम तुमको मुबारक हो,
मैं सरहद पर ही अपनी जान की कीमत बता दूँगा,
वतन से ही मुहब्बत है,
वतन से ही इनायत है,
मैं इसके इश्क में हद से गुजर खुद को मिटा दूँगा|

उधर दुश्मन करे आघात भारत माँ के छालो में,
इधर उलझा ही रहता है ये मन ऐसे सवालों में,
दुशासन बनके दुश्मन चीर माँ का खींचने आए,
तो कैसे मैं रहूँ आसक्त इक गोरी के गालों में|

मैं जिसकी गोद में खेला,
जहाँ मुझको मिलीं सांसें,
मैं उसकी आन की खातिर ये अपनी जां लुटा दूँगा,
तुम्हारे हुस्न की दौलत,
सनम तुमको मुबारक हो|

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