Birds Poetry – Poem About Birds in Hindi – अंतर्मन

Birds Poetry in Hindi

Birds Poetry

मेरे घर के मुंडेर पर नित एक चिड़िया आती है
फुदक – फुदक कर दाने चुुगती
मन को मेरे हर्षाती है ।

अंतर्मन में उसके लिए अपार स्नेह बरसता है
जैसे वह हो कोई मेरा सच्चा साथी देख
हृदय कमल खिल उठता है ।

आजाद होकर ये चिड़िया नील गगन पर उड़ती है
कितने हैं सुकोमल भाव इनके जो इतने प्रसन्न होते हैं ।

सोचती हूँ काश मैं भी होती चिड़िया
तो खूब उड़ती नील गगन में ,
हर दुख संताप को भूलकर ,
मैं भी नाचती नील गगन में ।

जिस दिन नहीं आती चिड़िया
उसका इंतजार करती हूँ
जब देर हो जाती आने में उसे ,
तो ऐसे भाव से मुझे देखती है ,
जैसे उससे हुई बड़ी गलती ,
उदासी प्रकट करती है ।

जब मैं फिर मुस्काती हूँ
तो फिर चिड़िया भी मुस्काती है ,
संग मेरे वह खूब आनंदित होती है ।

पर कुछ मानवीय दानव उन
चिड़ियों का शिकार करते हैं ,
आह होती मुझे भी बहुत पीड़ा ,
जो उन मासूम चिड़ियों का अंत करते हैं।

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