Blank Paper Poem – कोरे कागज़ ही तो है – Poem on Life Hindi

Blank Paper Poem – Poem on Life in Hindi

Blank Paper Poem

कोरे कागज़ ही तो है,
लिखा बहुत कुछ,
आँखों में समुन्दर,
सब मिट गया।

सबूत  मांगते हो,
नज़र तो घुमाओ,
झुर्रियां एक कहानी वयां कर देगी।

एक सुबह की तलाश करते थे हम,
वक़्त के फेर में शाम ढल गया,
कितने अमाबस गुजरे,
कितने चाँद है देखे,
अबके अमाबस इतनी लम्बी,
मेरा चाँद रूठ गया।

अब कलम भी मुझको पूछती है अक्सर,
और क्या लिखना है शाम बुझने को है,
चलो छत पर शायद फिर चाँद दिख जाये।

कोरे कागज़ ही तो है,
लिखा बहुत कुछ,
आँखों में समुन्दर,
सब मिट गया।

Read more:

Add a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Pin It on Pinterest