Cheekh Poem – सन्नाटे चीख रही है – Poem on Imagination

Cheekh Poem – Poem on Imagination

Cheekh Poem

सन्नाटे चीख रही है हर तरफ
मैं और मेरे ख़ामोशी
एक दूसरे से लिपटे हुए है।

मैं खुद से इतना दुर कभी ना था
दफ्न है साँसे अक्स कि कमी सी है।

ये कहकशां कि शाजिश है शायद
कोई तो सितारों में कमी सी है।

अकबर के दरबार में गुहार बहुत
मेरे आवाज में कुछ कमी सी है।

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