Confusion Poems – पहेली हो या कोई अनसुनी – Ghazal Poem

Confusion Poems – Ghazal Poem

Confusion Poems

पहेली हो या कोई अनसुनी,
जो भी हो तुम दिल में बस गयी।

एक चाँद की कसम रात की रानी,
चांदनी भी तुमसे कम पर गयी।

पहेली हो या कोई अनसुनी,
जो भी हो तुम दिल में बस गयी।

अब फीका सा लगे,
हर सुबह तेरे बिन,
तू न आये तो ये सूरज,
कुछ मंद पर गयी।

अब तो दिल जिस्म जां सबकुछ तेरा,
तेरे बिन अब ये जिस्म बिन रूह हो गयी।

साँसों पे मुझको अबतक,
एतवार सा था,
धडकनों पे मुझको,
अबतक गुमान सा था,
तेरे बिन अब ये साँसे मुझे अजनबी कह गयी।

पहेली हो या कोई अनसुनी,
जो भी हो तुम दिल में बस गयी।

Read more:

Add a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Pin It on Pinterest