Dil Ki Baat Poetry – दिल की बात है मेरी मर्ज़ी – Ghazal Poem

Dil Ki Baat Poetry – Ghazal Poem

Dil Ki Baat Poetry

दिल की बात है मेरी मर्ज़ी तो नही चलती,
एहसान इतना करदे ,
के धडकनों की भी सुन लेना….
लोगों का क्या है,
आँखों पे मुकद्दमे चलाएंगे,
हमने तो पिली जिन्दगी इनसे,
जमाना कहेंगे तो क्या,
तू उनका मत सुन ना……

बेसबब इलज़ाम लगा देंगे,
कसूरवार मुझको ही कह लेंगे,
कोई तो इस दिल से भी पूछ ले,
मर्ज़ी तो उसकी थी हमने सिर्फ बात मान ली….

दिल की बात है मेरी मर्ज़ी तो नही चलती…..

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