Doctors Day Poem – Request to The Doctor – ईश रूप तुम

Doctors Day Poem – Request to The Doctor

Doctors Day Poem

ईश रूप तुम माने जाते,
सारी जनता है करती पूजा,
सेवा भाव हो लक्ष्य तुम्हारा,
तुम जैसा नहीं और है दूजा।

है करबद्ध प्रार्थना तुमसे,
धर्म रूप धर कर्म करो तुम,
दीन-दुखी सब बिलख रहे हैं,
भगवत रूप में दिखते हो तुम।

मान-सम्मान गिर रहा बहुत अब,
थोड़ा उसका ख्याल करो,
चरक, सुश्रुत आदर्श हैं तेरे,
उनका तुम अभिमान करो।

परम चिकित्सक ! मान तुम उनका,
कभी नहीं खोने देना,
सेवा भाव ही कर्म तुम्हारा,
इस पथ पर चलते रहना।

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