Dream Home Poem – मेरे ख्वाबो के एक घर हो – Ghar Poem

Dream Home Poem – Ghar Poem

Dream Home Poem

मेरे ख्वाबो के एक घर होगा,
चार दीवारें नही चार लोग होगा,
लहू का रंग लाल होगा,
मेरे ख्वाबों के एक घर होगा।

आँगन मे धुप फर्स होगा,
चाय का प्याला गरम होगा,
कुछ नन्हे किल्कारिया होगा,
मेरे ख्वाबों के एक घर होगा,
चार दीवारे नही चार लोग होगा,
खिड़किया घर मे रोशन होगा।

चिड़ियों कि भी पर होगा,
छत पर आसमां के छाव होगा,
मेरे ख्वाबों के एक घर होगा,
चार दीवारे नही चार लोग होगा।

मेरे घर मे दरवाजा खुला होगा,
हाथ खुला सलाम हर वक़्त होगा,
खंजर नही लड्डू के थाली होगा,
बोली नमकीन नही शहद होगा,
मेरे ख्वाबों के एक घर होगा,
चार दीवारें नही चार लोग होगा।

पूरब होगा पस्चिम होगा,
मन मे हर दिशा खुला होगा,
दिल मे प्यास कि समुन्दर होगा,
सोच आसमां से थोड़ा आगे होगा,
मेरे ख्वाबों के एक घर होगा।

चार दीवारें नही चार लोग होगा,
दिल मे रिस्तों का नाम होगा,
पहचान होगा नज़र के पास होगा,
जहाँ मे उन्मुक्त नीला होगा,
एक रब होगा जो अपना होगा,
मेरे ख्वाबों के एक घर होगा,
चार दीवारें नही चार लोग होगा।

ना दवा होगा ना जहर नीला होगा,
ये जहाँ तेरा होगा ये जहाँ मेरा होगा,
पैरो तक चददर होगा पूरा होगा,
दीवाली होली बकरीद के बहाने होंगे,
वो तेरा मेरा सबका होगा

चूल्हा होगा सिगरी होगा,
तवे के रोटी गरम होगा,
हर रात के पेट भरा होगा,
तेरे ख्वाबो के नींद पूरा होगा।

मेरे ख्वाबो के एक घर होगा,
चार दीवारें नही चार लोग होगा,
लहू का रंग लाल होगा,
मेरे ख्वाबों के एक घर होगा।

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