Eyes Poem – आँखों में बादल अपना – Ghazal Poem in Hindi

Eyes Poem – Ghazal Poem in Hindi

Eyes Poem

आँखों में बादल अपना,
बारिश कोई मुजरिम तो नही।
चेहरे पर घटा यूँ जो छाए,
सावन कोई मुलाजिम तो नही।

दर्द के बहाने अजीब है,
अपना रस्ता ढूढ़ ही लेते,
कोई तो ये बताये,
ये रिश्ता पुराना क्या है।

आँखों में बादल अपना,
बारिश कोई मुजरिम तो नही।

दिल भी आदत से मजबूर,
धड़कना एक काम ही तो है।
जख्म की लत लगी है,
नासूर हुआ तो क्या है।

आँखों में बादल अपना,
बारिश कोई मुजरिम तो नही।

कोई पूछता नही आजकल,
हादसों पे नज़र नही घूमते।
मर भी जाओ तो भी कम है,
मुर्दे कब कहा बोलते।

आँखों में बादल अपना,
बारिश कोई मुजरिम तो नही।

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