Fairies Poem – परीओं का मेला – Poem on Joy

Fairies Poem – Poem on Joy

Fairies Poem

माँ ने कही थी ये जहाँ परीओं  का मेला,
ये दुनिया खुबसूरत ख़ुदा  ने है खेला,
माँ ने कही थी सब में ख़ुदा रहता है,
तुम भी हो ख़ुदा के प्यारे बन्दे,
माँ ने कही थी ये जहाँ परीओं  का मेला।

माँ आज मैंने दुनिया को देखा,
परी ना मिली जहाँ पैसेवालों का मेला,
खुबसूरत ये दुनिया पर कीमत बड़ी है,
ख़ुदा के शहर में बस एक ख़ुदा ही नही है,
हम प्यारे नही माँ बस भीड़ कहे जाते,
माँ ने कही थी ये जहाँ परीओं  का मेला।

माँ पैसों के खातिर हम बेचे जाते,
हम बच्चे नही नौकर कह जाते,
हाथ में कलम तो नही बस बोझ दिए जाते,
माँ यहाँ खाना तो मिलता पर जहर बन जाते,
हमें उड़ने की आज़ादी दिए तो नही है,
माँ एक फूटपाथ है हम वहा भी मारे जाते,
माँ ने कही थी ये जहाँ परीओं  का मेला।

माँ आजकल हमें कोई ख़्वाब  नही दीखता,
अँधेरे में जहाँ कोई रौशनी नही दीखता,
यहाँ कप प्लेटों की कीमत हमसे है ज्यादा,
अब तो जिन्दा हूँ बस तुमसे किया हूँ जो वादा,
माँ ने कही थी ये जहाँ परीओं  का मेला।

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