Fingers Poem – हर शाम रेत पर उँगलियों – Romantic Love Poem

Fingers Poem – Romantic Love Poem

Fingers Poem

हर शाम रेत पर उँगलियों पे एक नाम लिखता,
जानते थे रेत कि दोस्ती अच्छी नही,
पर क्या करता,
दिल पे लिखता जो मिट ता नही।

एक सूरज बस रात कि दुरी रखता है,
चाँद को देखो चौदवी कि हिसाब रखता है,
पर दिल पर दाग सदियों में ना मिट ता है।

लोग दरवाजे पर कई नाम लिखते है,
उम्मीदों पर नज़रे निशान रखते है,
दिल कि क्या बात करूँ यारों,
हर बीती बातों पर दिलो जां रखते है।

ये खिड़की से चाँद भी अपना होता है,
चांदनी फर्स पे हो तो सुहाना लगता है,
कुछ जमीं से चाँद को देखो,
तो वो भी दूर का कोई ख्वाब लगता है,
दिल ही हालत कुछ ऐसी है रक़ीब,
हर पुराना दुश्मन उसे जिगरी यार लगता है।

आसमां में बादल कितने सूरत बदले,
कितने मौसम बदले कितने रंग बदले,
और ये नासमझ दिल इन्हे बहार समझे,
पर टूट ता कभी आसमां दिल पे,
फिर तो जिंदगी बदले दिल के धड़कन बदले।

अब तो ख्वाबों तक अपना जात बदला है,
हर वो अपना पहनावा से लहू तक बदला है,
दिल तू अब अपना धड़कन बदल ले,
अब तो तुझपे सितारों का रुख बदला है।

हर शाम रेत पर उँगलियों पे एक नाम लिखता,
जानते थे रेत कि दोस्ती अच्छी नही,
पर क्या करता,
दिल पे लिखता जो मिट ता नही।

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