Future Poem – स्वर्णिम भविष्य – Poem About Future Life

Future Poem – Poem About Future Life

Future Poem

इतिहास कभी
पीछा नहीं छोड़ता
वह तो निरन्तर
सवार रहता है
वर्तमान की पीठ पर
बेताल की तरह
वर्तमान भले ही
कितना ही समृद्ध
क्यों न हो जाए
मगर इतिहास करता
रहता है कुंद
वर्तमान की धार
जिससे निरन्तर
धीमी होती जाती है

भविष्य की चाल
मगर जो आदमी
बिठा लेता है
बेताल रूपी इतिहास
के साथ धीर
विक्रम सा सामंजस्य
उस आदमी का इतिहास
हो जाता है कालातीत
और सामने रह
जाता है केवल
स्वर्णिम भविष्य

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