Gum Poem – कुछ तो कही गुम सा है – Ghazal Poem About Love

Gum Poem – Ghazal Poem About Love

Gum Poem

कुछ तो कही गुम सा है,
पास है हम तुम मगर,
एक दरमियां सा है…

कभी खास था,
कभी सांस था,
नासाज़ अब दिल यहाँ,
एक बर्फ सा है।

कुछ तो कही गुम सा है….

साल गुजरे है कितने,
एक अमाबस ना गुजरा,
ख़ामोशी जम गयी इस कदर,
दिल धड़कती रही पर,
एक भी आवाज ना गुजरा।

लम्हों की बेबसी सुन रहे थे हम तुम,
पर बक्त निकला था कही,
और जिन्दगी भी कुछ नाराज़ सा है।

कुछ तो कही गुम सा है….

ख्वाहिसे दोनों की थी,
दिल को कही एक परवाज़ तो मिले,
पर आसमां खोया था इस कदर,
अब जमीं भी लगती कोई बोझ सी है।

कुछ तो कही गुम सा है,
पास है हम तुम मगर,
एक दरमियां सा है…

Read more:

Add a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Pin It on Pinterest