Hindi Kavita on Nari – मुझे नहीँ चाहिए – Hindi Poem on Women

Hindi Kavita on Nari – Hindi Poem on Women

Hindi Kavita on Nari

मुझे नहीं चाहिए
तुम्हारे वायदों का सागर
जिसमें तैरती हैं
सुनहरी मछलियाँ
और मै
डूब जाती हूँ
मुझे नहीं चाहिए
अवसर
रोटी के लिए चूल्हे में जलने का
शाम की प्रतीक्षा
और पेट की तरह पलने का
मुझे चाहिए
आत्म निर्णय का अधिकार
अपनी देह
अपनी कोख
और अपनी सोच पर
तुम्हारा प्रेम, जिसका दावा
तुम्हारी ज़रूरत जैसा है
यदि, वास्तव में सच्चा है तो
मुझे कुछ भी नही चाहिए
तुम से, प्रेम के सिवाय
बस छोड़ दो आदत
छीन लेने की
जिसे, तुम अपना
अधिकार समझते हो

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