Hungry Poem – भुखमरी को श्रद्धांजलि – Hindi Poem on Life

Hungry Poem – Hindi Poem on Life

Hungry Poem

भूख के समीकरण की बिछी हुई बिसात है,
शतरंज के इस खेल में बस शह और मात है.

मौत के मुआवज़े भी हैं मौत के इनाम भी,
मौत की सियासत में मौत के कोहराम भी,
चारो तरफ फैला हुआ मौत का व्यापार यहाँ,
मौत को मिलती कहीं महिमा अकस्मात है,
शतरंज के इस खेल में बस शह और मात है.

आँत की ऐंठन यहाँ पहचान की मोहताज़ हैं,
भूख पर सफाइयाँ जो कल थीं वही आज हैं,
उम्मीद के चूल्हों पर भी गाज़ गिरने है लगी,
कैसे बचेगी ज़िन्दगी जब वायदों का भात है,
शतरंज के इस खेल में बस शह और मात है.

भूख की कराह भी साँसों में कहीं खो गई,
भात भात करते चिर नींद में वह सो गई,
षड्यंत्र में शामिल सभी लूट के इस तंत्र में,
भुखमरी की मौत का अभियुक्त केवल भात है,
शतरंज के इस खेल में बस शह और मात है.

Read more:

Add a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Pin It on Pinterest