Laal Rang Poem – किसके दामन लाल रंग सना – Poem on Behavior

Laal Rang Poem – Poem on Behavior

Laal Rang Poem

किस किसके दामन लाल रंग सना है,
धो लेना नदी में गर पुण्य कमा है,
कोई पूछेगा तो कह देना,
ये रंग ही है बर चड़ बोला है।

हाथ उठाके खुदको दिखाना,
वहा रंग नही आइना दिखेगा,
तुमसे कुछ सवाल भी पूछेगा,
उन सवालो पे तुम गौर ना करना,
बस हाथ झारके अनसुना कर देना।

लोग रंग की मजहब पूछेंगे,
कह देना कोई फर्क नही है,
तुम्हे तो बस ये रंग ही लगता,
किसका भी हो तुम्हे कम नही लगता।

फिर भी ,बस एक से थोड़ा बचके रहना,
जहा रंगों का कोई भेद नही है,
किसीका भी हो वहा हर रंग कीमती है,
वहा रंगों का हिसाब देना है,
छुटे कुछ तो जबाब देना है।

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