Language Poetry – भाषा – Poem on Language in Hindi

Language Poetry in Hindi

Language Poetry

भाषा!क्या है भाषा?
क्या भाषा इनसान कि पहचान है!
या भाषा विकास को आंकने का मानक है!
क्या भाषा महानता या तुच्यता का सुचक है!
भाषा! आखिर क्या है?
क्यो इसे लेकर बवाल होता है?
क्यो भाषा भी बटवारे कि आँच सेक रही।
भाषा भाव को, अहसास को अपनी बात को
समझाने का, रखने का तरिका, माध्यम है
जो आपसी समझ को असान बनाता है, है ना।
तो फिर इसे लेकर शिकायत कैसी!
भाषा को किसी के वर्चस्व का आधार क्यो बनाते हो?

हिन्दी हो या इंग्लिश, तेलगु हो या फारसी,
संस्कृत हो या उर्दू,
आखिर क्यो इतना फर्क पडता है?
जब उद्देश सबका एक है।
भाषा तो जोडने के लिए होती है,
तो फिर कैसी ईष्या और कैसा मोह!
संस्कृति और सभ्यता का हनन किसी भाषा को अपनाने या छोडने से नही बल्कि विचारो के बदले से,
उनके दूषित हो जाने से होता है।
भाषा कोई भी हो वो प्रभाव उसके इस्तेमाल के तरिके पर निर्भर करता है।
फिर संदेश अच्छा हो या बुरा।।
भाषा! मेरे लिऐ बस एक सहारा है।
जो मेरी अभिव्यक्ति का साहिल है।।

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