Light Sound Poem – कल रात चाँद के आहट सुना था – Poem on Moon

Light Sound Poem – Poem on Moon

Light Sound Poem

कल रात चाँद के आहट सुना था,
बेचैन था शायद,
पर किस बात के!

चांदनी खिड़की के रस्ते,
मेरे कानो पर दस्तक दे रही थी,
मानो कह रही थी,
चाँद वहाँ परेशां है और तुम सो रहे हो!

मैं सोया कहा था,
बस यादों पर करवटे ले रहा था।

ये चाँद भी कभी खुश रहता था,
रह रह कर मेरे साथ आंखमिचोली खेलता था,
आज खामोश तन्हा जाग रहा है।

मैंने पूछा चाँद तू क्यों चुप है,
उसने बोला,
तेरे दिल में वो सरगम कहा है,
आजकल तू छत पे नही आता,
तू भी तो मुझसे मुह छिपाता।

गर तू चुप रहेगा चार दीवारों में,
कौन कहेगा मेरा राग ज़माने में,
तेरे लफ्ज़ो पे मेरा श्रृंगार है होता,
आज खामोश तू!
पूछता मैं क्यों गुमशुम हूँ रहता।

मुझे तो तेरे धड़कन तक जाने,
मेरे हर आलाप तेरा दिल पहचाने,
गम है तुझे कुछ गुजरे लम्हो पर,
पर मैं तेरे साथ सदियों से जागु,
पूछ ले दिल से ये छत गबाह है।

मेरे चांदनी को देख,
तेरे खिड़की ना छोड़े,
हर रात मेरा नाम लेके वो तुझे पुकारे।

मेरा चौदवी तक तेरा रास्ता निहारे,
तेरे भीगी तकिये मुझे भी रुलाये,
छोड़ दे यादों के आग में जलना,
मैं हूँ मेरा चांदनी है,
ये दिल को भिगोले हमें साथ है जीना।

तू कवि तो मैं चाँद हूँ,
तेरे लफ्ज़ है तो बेदाग़ हूँ,
गर तू न होता मैं चाँद न कहलाता,
तेरे कलम से मैं हँसता खिलता।

कल रात चाँद के आहट सुना था,
बेचैन था शायद,
पर किस बात के!

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