Mazak Poetry – ए ख़ुदा ये क्या मजाक है? – Hindi Kavita

Mazak Poetry – Hindi Kavita

Mazak Poetry

ए ख़ुदा ये क्या मजाक है
लोग तेरा ही नाम पूछे है
कहा रहता है तू पेहचान पूछे है
ए ख़ुदा ये क्या मजाक है….

कोख से जो निकले तो माँ ख़ुदा है
बचपन से जवानी पिता ख़ुदा है
पूरी जिंदगी पैसा ख़ुदा है
पर कब्र जो करीब तो आप ख़ुदा है
ए ख़ुदा ये क्या मजाक है….

चोली के रंग पे कई नाम ख़ुदा है
हर घर मे हर दीवारों मे ख़ुदा है
यहा तक कि गौर से देखो बाज़ारों मे ख़ुदा है
तेरे नाम के तस्वीर बहुत बिकते है
तुझपे तो मौल भाव भी होते है।

अमिर से गरीब हर कोई हाथ फैलाये
मांगे तुझसे हर रोज़ बड़ते है
किसी से पूछो तेरे दिल मे ख़ुदा है..!
हसेंगे सब लोग यहाँ फुरसत किसे है।

यहाँ वक़्त कि कीमत पैसा होती है
रिस्ते जायज़ पैसा होती है
भूख रोटी से ज्यादा पैसा होती है
यूंकि हर दुया सलाम तक पैसा होती है।

आज बारात जनाजे मे फर्क कम है
सुख से दुख़ का सफ़र भी पैसा होती है
ए ख़ुदा ये क्या मजाक है….

जो अलग होता है तो बोले ख़ुदा कि मर्ज़ी
जो हाक़िम ना बोले तो ख़ुदा कि मर्ज़ी
जो भूखे मर जाये तो ख़ुदा कि मर्ज़ी
कोई भी आफत आये तो ख़ुदा कि मर्ज़ी
ए ख़ुदा ये क्या मजाक है….

तूने आँखे दी सबको पर नज़र गायब है
तूने हाथ दी सबको पर दुया ग़ायब है
तूने दिल दी सबको पर रहम ग़ायब है
तूने ये इंसान बनाया पर इंसानियत ग़ायब है
ए मालिक ये क्या मजाक है….

यहाँ लहू के रंग अलग है
मिटटी के जात अलग है
तुझसे मिलना है तो दरवाजे तक अलग है
ए ख़ुदा ये क्या मजाक है….

नादाँ है सब हम अब तेरा रहमत बरसा
तू ही मालिक रब है हम सबका
ये ख़ालिक़ अब तू ही भरोसा।

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