Memories Poem – कैसे भूल सकते है – Poem on Life in Hindi

Memories Poem – Poem on Life in Hindi

Memories Poem

कैसे भूल सकते है,
ये जमीं ये नाते,
आखिर रेत पर पैर कहा टिकते है।

कैसे भूल सकते है,
इन पगदंडियो में शाम,
सूरज रोज़ मिलके जाता था,
कुछ आशा कुछ भोरोसा देके जाता था।

कैसे भूल सकते है,
जिन्दगी के थपेरों से लथपथ हुयी रात।
कुछ दूर सितारे थे,
भरोसा था तो सिर्फ जुगनुओ पे ,
टिमटिमाते रौशनी मेरे आशायों को लौ दे रही थी।

कैसे भूल सकते है,
जब कदम लडखडाये थे,
सरे लहूँ के रिश्ते सूखे थे,
कुछ दूर के अपने थे,
बड़ी देर तक साथ थे ;आज भी है।

कैसे भूल सकते है,
मंदिर मस्जिद गिरजाघर के गलियां,
एक वही दरवाजे थे ;देर तक खुले थे,
आज भी दिल को रोशोन करती है।

कैसे भूल सकते है,
मेरे घर के पीपल पेर को; मेरे पिता,
मेरे आधार थे , छाओ थे,
मेरे बिस्वास के मूल पर प्रेरणा के श्रोत थे।

कैसे भूल सकता हूँ
कैसे भूल सकते है
कैसे भूल सकते है…….

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