Mirror Poem – ये चाँद तेरा आइना देखा Ghazal Poem About Love

Mirror Poem – Ghazal Poem About Love

Mirror Poem

ये चाँद तेरा आइना देखा,
इस जमीं की है,
उस में तुझको देखा !!
ये चाँद……

उसके गेशुओ में बादल आवारा देखा,
उसके रंगत में चाँदनी खिलते देखा,
बस एक फर्क है उसमे क्या कहु तुझको!!
बेदाग़ यूँ हुस्न खुदको जलते देखा।

ये चाँद तेरा आइना देखा,
इस जमीं की है ,
उस में तुझको देखा!!
ये चाँद……

मूरत है कोई कही कमी नही देखा,
उसके आने से हमने ए रात रोशोन देखा,
उसके हँसी में हमने कीमती मोती देखा,
उसके आँखों में हमने सात समंदर देखा।

ये चाँद तेरा आइना देखा,
इस जमीं की है,
उस में तुझको देखा!!
ये चाँद……

ना जलना तू मैं कोई आशिक नही हूँ,
क्या करू इस दिल का पल पल रुकते देखा,
समझाया मैं कितना नासमझ कहा समझा,
अब तो धड्कोनो को अपने साथ छोड़ते देखा।

ये चाँद तेरा आइना देखा,
इस जमीं की है,
उस में तुझको देखा !!
ये चाँद……

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