Moments Poem – बीती लम्हों पर अब ऐतबार – Ghazal Poem

Moments Poem – Ghazal Poem

Moments Poem

कितनी हसरते बहाना ढूढती है,
नींद टूट जाये फिर भी ख्वाब बुनती है.

कितने अरमानों के महल बनते बिगड़ ते है,
फिर भी उम्मीदों के सितारे जलते है.

कोई कैसे सुबह को इलज़ाम दे पाए,
रात के जले ख्वाब तो येही खिलते है.

बीती लम्हों पर अब ऐतबार ना करना,
ख्वाहिसे अब भी कहानी लिखती है.

ना बुझाना दिए आंधियो के वास्ता देकर,
तुझे हे मंजिल की कसम इसे जलाये रखना है….

कितनी हसरते बहाना ढूढती है,
नींद टूट जाये फिर भी ख्वाब बुनती है.

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