Not Alone Poem – मेरे अलावा घर में एक Poem on Hope in Hindi

Not Alone Poem – Poem on Hope in Hindi

Not Alone Poem

मेरे अलावा घर में एक आइना है,
तसल्ली है मैं तन्हा नही हूँ।

हम दो बाते कर लेते है,
एहसास जताती मैं अकेला नही हूँ।

ऐसे तो चार दीवारे भी है,
हम पाँच हमेशा साथ रहते है।

एक छत भी है भोरौसा देती,
मत घबरा तू मैं ऊपर हूँ।

एक खिड़की है आसमां लाती घर,
मेरे ख्वाबों को पंख देती अक्सर।

जब जब अंधेरा घर में बसता,
एक चाँदनी है जो दिल से हँसता।

अब ना कहना मैं तन्हा हूँ,
ये सब है मेरे मैं जिन्दा हूँ।

मेरे अलावा घर में एक आइना है,
तसल्ली है मैं तन्हा नही हूँ।

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