Do Not Poem – ना जाना यूँ खामोश रहके – Ghazal Poem

Do Not Poem – Ghazal Poem

Do Not Poem

ना  जाना यूँ खामोश रहके
अलबिदा तो कह के जा
रह गए जो अधूरे सपने
कल के वादा करके जा।

ना जाना यूँ…।

तेरे बिन लम्हों का एहसान होगा
तेरे आने तक ना रुके कभी,
तेरे बिन ये साँसे क़र्ज़ होगा
तेरे आने तक ना थमे कभी।

मैं इक वादा करता हूँ
ना सोयुंगा रात कयामत तक।
ये पलके ना गिरेगी मेरे हमदम
तू जो आये ना मिलने मेरे कब्र तक।

मुझे मिसाल की चाह नही मगर
तू लौट के आये ये मन्नत है।

ना  जाना यूँ खामोश रहके
अलबिदा तो कह के जा।

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