Word Poem – कुछ लफ़्ज गिरके – Feeling Alone Poem

Word Poem – Feeling Alone Poem Word Poem कुछ लफ़्ज गिरके बिखरे थे आस पास कुछ अपनों के कुछ पराये ! सोचा कुछ चुन लूँ अपनों कि तो हिम्मत ना थी कुछ पराये शायद काम आ जाएं ! कितने अजीब थे वो लफ्ज़ मीठे तीखे रंगीन बासी चारो तरफ मक्खियाँ भनभनाती नज़र आये। ख़ामोशी कि

Ishq Poem Lyrics – जाने किस बात पे – Song Poem on Life

Ishq Poem Lyrics – Song Poem on Life Ishq Poem Lyrics जाने किस बात पे नज़रे फेरा जिंदगी तलब थी फिर क्यों यूँ मुझसे रुख मोड़ा जाने किस बात……………. मौला इस दुनिया में सही क्या है मैंने तो इश्क़ को दुनिया माना फिर क्यों शहर इसे गलत जाना जाने किस बात……………. इस जहाँ में ख़ुदा

Kuch Toh Bata Lyrics – कुछ तो बता दे दिल – Poem on Heart

Kuch Toh Bata Lyrics – Poem on Heart Kuch Toh Bata Lyrics कुछ तो बता दे दिल हमें क्या हक़ है क्या नही बेबजह टूटने की आदत बुरी कुछ तो बता……….. ये जो महल है ताश की औकात अब तो तूफां से क्या पुरवाई भी कातिल कुछ तो बता……….. ढूढ़ते रौशनी शाम से पहले अब

Zindagi Song Lyrics – देख ले जिंदगी – Hindi Poem on Life

Zindagi Song Lyrics – Hindi Poem on Life Zindagi Song Lyrics देख ले जिंदगी मैंने आवारगी की हद की बहुत डराया शहर मैंने जीने की हद की देख ले जिंदगी……. मोमिनों ने हिदायत दी शहर ने पत्थर शुक्र उस साकी की माना जिसने हमें थोड़ी और पिने की सलाह दी देख ले जिंदगी……. चाँद ने

Alone Life Poem – कुछ गिला गिला हाथ – Poem About Life Lesson

Alone Life Poem – Poem About Life Lessons Alone Life Poem कुछ गिला गिला हाथ शहर अपनों का सिरा ना मिल पाया कुछ सूखे पत्तों के साथ बसर अपनों का आहट सुनने को तरस गया। कुछ गिला गिला हाथ शहर…………… कब साथ चला था कोई रहबर कदमों के निशा भी धूल सा गया एक ख्वाब

Yaadein Poem – क्या दिल तुझको पता – Poem About Life Lessons

Yaadein Poem – Poem About Life Lessons Yaadein Poem क्या दिल तुझको पता है अब रात है लम्बी और ये सितारें हमराज है। कुछ यादों के बारात कुछ लम्हों की कई बात कुछ छत पर गीले चांदरात और ये तन्हाई की खैरात है। क्या दिल तुझको पता है……. क्या दिल तुझको पता है हम तन्हा

Rajneeti Poem – ये सियासत के रखवाले – Poem About Politician

Rajneeti Poem – Poem About Politician Rajneeti Poem ये सियासत के रखवाले ना कर ऐसा जुल्म के ख़ालिक़ भी अब मुह छुपाले। किल्कारिओं की सरहद पूछते हो पैदाइश कहा शहर पूछते हो किस रंग का है चादर पूछते हो उससे मिटटी की जात पूछते हो। अभी अभी तो पैर रखा वो उससे भी कौम कलाम

Baarish Poem – कल रात बरसात में – Poem on Rain Rhyming

Baarish Poem – Poem on Rain Rhyming Baarish Poem कल रात बरसात में सारे पत्ते गीले हो चुके अब आँखों को तरसते देख रहा हूँ। जाते हुए क़दमों के निशाँ सारे मिट चुके अब यादों को बरसते देख रहा हूँ। कल रात बरसात में…………… कुछ अरमां से भीगे लम्हे सांखो से गिर रही धीरे धीरे

Dil Ki Kavita – ये दिल तू आज कैसी है – Poem Heart in Hindi

Dil Ki Kavita – Poem on Heart in Hindi Dil Ki Kavita ये दिल तू आज कैसी है कुछ तो बता क्या कल जैसी है ये दिल……………. रात काली थी कल पर आज सुबह नयी जैसी है ये दिल……………. कुछ ना छुपा मुझसे कुछ तो बता तू कैसी है देख नीली धुप की मस्ती ये

Sleep Poem – दरवाजे पे दस्तक थी – Feeling Alone Poem

Sleep Poem – Feeling Alone Poem Sleep Poem दरवाजे पे दस्तक थी कुछ सन्नाटे की आहट शायद मैं ख्वाबो को ठीक समझा और सो गया !! गूंज रही थी दस्तक बार बार हवाएँ भी शरारत करती है मैं ख्वाबो को ठीक समझा और सो गया !! ना रुकी थी वो दस्तक धड़कन भी शोर मचाती

Sunshine Poem – चिलचिलाती धुप – Poem on Sunshine

Sunshine Poem – Poem on Sunshine Sunshine Poem चिलचिलाती धुप तप रही थी जिस्म ख़ामोशी कोई अनजान आहट सी थी मैं और मेरे सपनों की उड़ान चल रहे थे हाथ थामे। सर्द रातें कपकपाती हड्डिया नब्ज़ सुन्न पड़ी थी मैं और मेरे सपनों की उड़ान चल रहे थे हाथ थामे। सुखा ही सुखा हर तरफ

Shapath Poem – मैं शपथ लेता हूँ – I Promise to Myself

Shapath Poem – I Promise to Myself Shapath Poem मैं शपथ लेता हूँ उन राहों से फिर ना गुजरूंगा बहुत धूल है निशां परते नही। मैं शपथ लेता हूँ………. मैं शपथ लेता हूँ उन गलियों की खाख नही छानूँगा भूलभलैया है निकलते निकलते झुर्रियों की पता चलता नही। मैं शपथ लेता हूँ………. मैं शपथ लेता

Gone Poem – मैं गिरा फिर उठा – Poems About Life Experiences

Gone Poem – Poems About Life Experiences Gone Poem मैं गिरा फिर उठा बस तफ़रिहात करते चला गया तिश्नगी खल रही थी मैं अहमक जिंदगी पीता और पीता चला गया. एक अक्श टोका मुझे मैं कुछ ऊंचा कुछ निचा करते चला गया सागर-वो-मीना मे डूबा था इसकदर कुछ भला और कुछ बुरा करते चला गया.

Feeling Life – कुछ गोल गोल लकीरें – Imagination Poem

Feeling Life – Imagination Poem Feeling Life कुछ गोल गोल लकीरें खीच रहा हूं सुबह से शाम सिरे कि तारीख नही। ख़ामोशी कि जबान बोल रहा हूँ चीख चीख कर सुननेवाले सुनते नही। परोस के मिठाईवाला जब जलेबी बनाता है मुझे दुनिया दिखती है अंगारो मे तलते हुए। गड्ढे कि गहराई मापता हूं क्युकी सारे

Dil Poem – मैं कैसे क्या करता – Question Poetry

Dil Poem – Question Poetry Dil Poem मैं कैसे क्या करता एक कागज़ का दिल था लफ्ज़ कोरे सुर्ख जमीं की तरह सिलवटे पड़े थे दाग बन गए मैं कैसे क्या करता………………..!! यादों के पुलिन्दे बनाकर वो बड़ी वाली पूल के निचे छोड़ आया हूँ गर पास रहते बार बार दस्तक देते खामखा दिल बैठ

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