Part Poem – तेरे हिस्से का है तो मिल जायेगा – Poem on Faith

Part Poem – Poem on Faith

Part Poem

तेरे हिस्से का है तो मिल जायेगा,
ना मिला जो तेरे हिस्से में नही था।

खोने का है तो सबकुछ खोएगा,
जो मिल गया कुछ वो खोना नही था।

दर्द तो बहाना देता है जिंदगी को,
खुशियों का खजाना हमेशा तेरा ही था।

तेरे हिस्से का है तो मिल जायेगा,
ना मिला जो तेरे हिस्से में नही था।

दिल को मुसाफिर मान लो एकबार,
जिंदगी एक सफ़र है कर लो एतबार,
परछाई हरजाई निकले क़िस्मत तेरा ही था।

मौसम है जिंदगी बदलते रहना है,
कोई दो एक बरसात तेरा भी था।

तेरे हिस्से का है तो मिल जायेगा,
ना मिला जो तेरे हिस्से में नही था।

वक़्त है यारों ख़र्च होते रहेगा,
लम्हे है यारों यूँ जलते रहेगा,
ख़र्च करले मौजों में कुछ तेरा भी था।

रूह कैद है तेरे जिस्म कि कफ़स मे,
एक परिंदा जी रहा इस बेजुबान दिल मे,
उड़ जा मुसाफिर एक आसमां तेरा भी था।

तेरे हिस्से का है तो मिल जायेगा,
ना मिला जो तेरे हिस्से में नही था।

ख्वाब कि जिंदगी कि उम्र हज़ार,
ख्वाबो का फ़ितरत किसने जाना है,
सजा ले ख्वाब कुछ ईंटे तेरा भी था।

जहर कि आँख से चाँद को ना देख,
कभी चांदनी में जलकर चाँद को ना देख,
चांदनी लुटता फकीरों कि तरह,
तेरे छत से ये चाँद भी कुछ तेरा भी था।

तेरे हिस्से का है तो मिल जायेगा,
ना मिला जो तेरे हिस्से में नही था।

खुद को कब्र का इख्तियार मत कर,
कफ़न कि लम्बाई तेरे हाथ मे कब है,
कुछ रहमत ख़ुदा कि तेरा भी था।

तेरे हिस्से का है तो मिल जायेगा,
ना मिला जो तेरे हिस्से में नही था।

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