Poem on Ambition in Life – छोटे छोटे अरमां Poem on Ambition

Poem on Ambition in Life – Poem on Ambition

Poem on Ambition in Life

छोटे छोटे अरमां है मेरे,
कही तो है आसमां  भी मेरे,
मैं क्या अलग हूँ तुमसा नही,
मैं क्या पत्थर हूँ इंसान नही,
मुझे भी तुम जीने का हक दो,
गर आसमां नही तो जमीं का हक दो.

क्यों ये अँधेरा जिन्दगी है रौशनी से परे,
क्यों नही दीखता ये आसमां घर से मेरे,
पड़ता लिखता नही हाथो में छाले परे है,
मैं भागता नही पेरों में जंजीर जड़े है,
हँसता भी हूँ तो आँखों में समुन्दर है रहता,
गर रोता भी हूँ किसीको न दीखता.

मैं क्या अलग हूँ तुमसा नही,
मैं क्या पत्थर हूँ इंसान नही,
मुझे भी तुम जीने का हक दो,
गर आसमां नही तो जमीं का हक दो.

मैं नही मांगता तुम्हारा जमीन,
मुझे थोडा सही एक नाम तो दे दो,
मुझे कलम दे दो मुझे स्वाही दे दो,
मुझे भी है उड़ना मुझे पंख दे दो.

मैं क्या अलग हूँ तुमसा नही,
मैं क्या पत्थर हूँ इंसान नही,
मुझे भी तुम जीने का हक दो,
गर आसमां नही तो जमीं का हक दो.

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