Dowry System Poem – दहेज प्रथा – Poem Dowry

Dowry System Poem in Hindi

Dowry System

हां दर्द दिलों के थोड़े कम हो जाते
गर दहेज प्रथा का अभिशाप मिट जाते

लड़कियों को भी हक मिल जाते
जो उनके वजूद का कोई मोल न लगाते

दुनिया में भी इन्कलाब आ जाते
जो लोगों के दिलों में ये सोच आ पाते

गरीबों को भी नयी आस मिल जाते
जो दहेजलोभियों के आसार मिट जाते

नौजवानों को भी बल मिल जाते
जो खुद का सहारा लेकर जी पाते

हां भ्रूण हत्या भी थोड़े कम हो जाते
गर दहेज प्रथा का अभिशाप मिट जाते

रेगिस्तान में भी नदियाँ निर्मित हो जातीं
गर नारी शोषण भी पूरी तरह बंद हो जाते

तूफानों से भी सभी की कश्ती उबर जाते
गर दहेज प्रथा का अभिशाप मिट जाते

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