Poem on Hope and Faith – मेरा क्या यहाँ तेरा – Poem on Hope

Poem on Hope and Faith – Poem on Hope

Poem on Hope and Faith

मेरा क्या यहाँ तेरा क्या है,
अब आईने भी खामोश रहते है।

दो कल हमने साथ देखे थे,
आज वो कल कही और रहते  है।

दो दो करके हम ख्वाब थे बनाये,
अब मलवे है हम दो रहते है।

वो कल के भी कोई कल बनेंगे,
हम उस कल के भोरोंसे रहते है।

फिर हमारा कल हमसे मिलेंगे,
हम उस कल पे हँसके रो लेंगे।

न कोई सवाल होंगे न कोई जबाब,
हम फिर से एकसाथ रहेंगे,
हम अब देखे येही ख़्वाब।

मेरा क्या यहाँ तेरा क्या है,
अब आईने भी खामोश रहते है।

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