Poem on Teacher in Hindi – गुरुवे नमः – Poem About Teacher

Poem on Teacher in Hindi – Poem About Teacher in Hindi

Poem on Teacher in Hindi

गीली मिट्टी के लोंदे से
कच्चे घड़े की परिणिति
तुम्हारे कुशल हाथों से 
सृजन की पराकाष्ठा है
तुम्हारी शक्ति का नियंत्रित दबाव
भर देती है चाक की असहमति में
निर्माण की चकरघिन्नी
तुम्हारे हाथों का स्पर्श और
थापियों की चोट के बीच
आकार लेती हैं नयी संवेदनायें.

विचारों के कोलाहल में तुम्हारा ज्ञान
प्रवाहित करता है
नयी चेतनाएँ
मर्यादा का उत्तरदायित्व उठाये
गुरु तुम, विहंगम दृष्टा हो
सृष्टि के सृजन में
गुरु तुम, चैतन्य के सृष्टा हो.

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