Raise Your Voice – जब सबके हाथों का – Poem About Youth Today

Raise Your Voice – Poem About Youth Today

Raise Your Voice

जब सबके हाथों का गुलाब इक दम से ख़ंज़र हो जाए
हरियाली पावन पुण्य धरा इक दम से बंजर हो जाए
जब इन्द्रासन का अहंकार मदमस्त रहे ऊँचाई में 
कुदरत के कारिन्दे डूबें कायरता की गहराई में
तब सुनो कर्ण को धनुष बाण तलवार उठानी पड़ती है
नभ की छाती को चीर मेघ से धार बहानी पड़ती है

हे सुनो युवाओ इस भारत की नींव तुम्हारे कंधो पर
अब और भरोसा कर सकते ना गूंगे बहरों अंधों पर
शमशीर उठाओ दुश्मन के घर में घुस हाहाकार करो
अस्तित्व मिटाने जो आए उस पापी का संहार करो
जब शौर्य ताप टकराता है पत्थर भी सुनो पिघलता है
जिस ओर जवानी चलती है उस ओर ज़माना चलता है

हम कालचक्र के पृष्ठों पर इतिहास नया लिख जाएँगे
तम में डूबी इस पीढी को विश्वास नया लिख जाएँगे
जिस राह चले थे छत्रसाल हम उसी राह पर चलते हैं
उन वीर शिवा राणा की जख्मी भू पर मरहम मलते हैं
उनके सपनों को पूरा कर भू को आबाद कराएँगे
जंजीरों में जकड़ी भारत माँ को आजाद कराएँगे

अब भी कौटिल्य सरीखे गुरु भारत में पाए जाते हैं
अब भी तो चंद्रगुप्त मूरा माँ के घर ज्याए जाते हैं
अब भी अशोक-सम्राट विश्व को नतमस्तक कर सकते हैं
अब भी हम अपनी ज्ञान ज्योति से हर घर को भर सकते हैं
तो देर है क्यों ? आओ अब मिलकर मिथक सभी के तोडेंगे
भारत के खंडित भागों को हम एक सूत्र में जोडेंगे

आओ सरदार पटेलों के सपनों के घोड़े बन जाएँ
नापाकी मंसूबों की राहों में हम रोड़े बन जाएँ
आओ भ्रष्टाचारी सत्ताओं की भी नींव हिला डालें
जो रक्तपात करने आते जिन्दा ही उन्हें जला डालें
तुम कर सकते हो सबकुछ जिस दिन आत्मबोध यह आएगा
उस दिन ये अपना भारत सोने की चिड़िया बन जाएगा

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