Said Poem – यूँही कह दिया था – Love Poem for Her in Hindi

Said Poem – Love Poem for Her in Hindi

Said Poem

यूँही कह दिया था तेरे बेबाक पलके,
ना आना तुम फिर कभी,
ना दिखाना तुम्हारे साये।

ना आना कभी छत के मुंडेर पर,
ना आना कोई भी चाँद के बहाने,
यूँही कह दिया था तेरे बेबाक पलके।

तेरे होंठ में कपकपी सी थी,
चेहरे पर बादल के परछाई गीले थे,
आँखों पर कई समुन्दर जमाना था,
यूँही कह दिया था तेरे बेबाक पलके।

मैं सुनता क्या तेरे आँखों पे नज़रे टिका था,
ना गुजरा था कभी फिर उन गलिओं में,
ना गया था छत पे कपड़े तक गीले थे।

दिल के कुछ लम्हे छोड़ा था तेरे आँखों में,
चल दिया था कुछ यादों के निशानी,
दिल के पोटली में बांधके।

ना मुड़ा था पीछे न देखा था तेरी आँखे,
कैसे देखता कदमो से दुश्मनी जो हो जाती,
यूँही कह दिया था तेरे बेबाक पलके।

ज़माने से वादा किया था,
जिस्म तक छोड़ के आयुंगा कही,
ना आयुंगा फिर मुह उठाके।

इस दिल को सफ़र में पत्थरों से मिलवायूंगा,
टुकड़े टुकड़े करके गंगा में बहा दूंगा,
पर फिर से धड़कनो में तेरे नाम,
ना धड़कने दूंगा फिर से,
यूँही कह दिया था तेरे बेबाक पलके।

पर क्या करू साँसों ने बगाबत करदी,
कुछ दूर चला था कम्बकत ने,
तेरे चौराहे छोड़ा नही कि दम तोड़ दी,
यूँही कह दिया था तेरे बेबाक पलके।

शायद……….
यूँही कह दिया था तेरे बेबाक पलके,
ना आना तुम फिर कभी,
ना दिखाना तुम्हारे साये।

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