Saki Poem – दो घूंट दर्द मुझे तू और पिला – Poem Song Lyrics

Saki Poem – Poem Song Lyrics

Saki Poem

दो  घूंट दर्द मुझे तू और पिला दे साक़ी,
ये ग़मे रात कट जाये तू पिला दे साक़ी,
तू पिला दे तू पिला दे तू पिला दे साक़ी,
जब तक होश है तू पिला दे साक़ी।

दर्द कहा अब सूखे है जख्म,
इसे कुरेदना है मुझे तू पिलादे साक़ी,
कब के मुर्दे है साँस कहा अब बाकि,
ये जहर भी पिला दे तू पिला दे साक़ी।

शिबाय दर्द के महफ़िले रौनक कम था,
छिपे आंसू थे आँखों में नमक कम था,
ये मन को गिला करादे तू पिलादे साक़ी।

मचले है दिल थोड़ा मरहम दिला दे,
बरसात बहुत दूर है सुख गया जिस्म,
दो एक जाम तू इस बरसात के नाम पिला दे,
ये जिस्म से दिल सब भिगों दे साक़ी।

बहुत जिया जिंदगी को ग़मे मौत भी अब कम है,
दो पल साथ बस उनके तू दिलादे साक़ी,
फिर जितना चाहे तू पिला दे थोड़ी पिला दे साक़ी।

ना मिला परछाई अपना एक आइना दिला दे,
कोई आशिया नही अब सारा जमाना दिला दे,
आशिक़ी जिंदगी से इतनी कि,
अब सारे रिस्ते नाते तू भुलादे मुझे पिलादे साक़ी।

थोड़ी बेवफाई मुहब्बते जाम मे मिला दे साक़ी,
तो कुछ ख़ुदा भी कह दे बन्दों से,
इसे और ना पिला ना पिला रे साक़ी।

दो  घूंट दर्द मुझे तू और पिला दे साक़ी,
ये ग़मे रात कट जाये तू पिला दे साक़ी,
तू पिला दे तू पिला दे तू पिला दे साक़ी,
जब तक होश है तू पिला दे साक़ी।

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