Secret Pal Poem – कुछ पल बचाके मैं रख़ा हूँ Poem About Time

Secret Pal Poem – Poem About Time

Secret Pal Poem

कुछ पल बचाके मैं रख़ा हूँ,
साथ जो तेरा मेरा लिखा है।
कुछ अरमां सजाके रखा हूँ,
एक सपना जो तेरा मेरा है।
कुछ पल बचाके मैं रख़ा हूँ,
साथ जो तेरा मेरा लिखा है।

अजनबी लोग यहाँ चेहरे अलग है,
उसपर नकाब और रंग बहुत है।

दिलो दिमाग में बसाके रखा हूँ,
आँखों में बस तेरा चेहरा है।

मिटटी यहाँ के नमकीन बड़ी है,
आंसू की कीमत कोड़ी की है।
कुछ यादे मीठी संभाल रखा हूँ,
जो तेरा है सिर्फ मेरा है।

दिल का क्या कहे नीलाम हुया है,
हर धड़कन पर कीमत चड़ा है,
साँसों पे भी पाबंदी लगी है,
दो चार मैंने अब रोक कर रखा हूँ,
उस पर हक सिर्फ एक तेरा है।

कुछ पल बचाके मैं रख़ा हूँ,
साथ जो तेरा मेरा लिखा है।

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