Sky Poems – देख आसमा कैसे टूट रहा है – Hindi Poetry on Love

Sky Poems – Hindi Poetry on Love

Sky Poems

देख आसमा कैसे टूट रही है
हमे उसके जैसे टूट लेने दे
देख बारिश कैसे जमीं से मिल रही है
हमे तुझसे उस तरह मिलने दे।

देख हवाओं मे पत्ते कैसे गा रही है
मुझे तुझको वैसे गा लेने दे
इन फ़िज़ाओं मे रंग बदलीं बदलीं है
तेरे इश्क़ के रंग मे अब ढल जाने दे।

ये मासूम शाम जो ढल रही है
कही तेरी कमी खली जा रही है
ये गुलाबी सूरज मुझसे कह गयी है
तेरे गालों पर लाली कभी मिटनें ना दे।

रात के चाँद भी कुछ इस तरह खिल रही है
ये बादल मे हया मदमस्त घुल रही है
ये बेला महकें तेरे बालोँ पर रूहानी
मुझे इस महकते गेशुओं मे खो जानें दे।

देख आसमा कैसे टूट रही है
हमे उसके जैसे टूट लेने दे
देख बारिश कैसे जमीं से मिल रही है
हमे तुझसे उस तरह मिलने दे।

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