Statue Poem – बूत बने बैठे हो आप – Sad Poem in Hindi on Life

Statue Poem – Sad Poem in Hindi on Life

Statue Poem

बूत बने बैठे हो आप,
ये शहर ए मुहब्बत है,
और तुम जान छुड़ाके बैठे हो।

दिल मे पत्थर ना रखो,
दिल तो मोम का बिसात है,
बस कुछ अपना कुछ शहर का पिघल ने दो।

कातिलों के निगाहों से ये शहर ना देखो,
ये शहर दिल फकीरों का बिसात है,
मांग लो जां तो भी दे देगा।

यहाँ मुहब्बत नाम है हर दरवाजे पर,
हर कही दिल में इश्क़ सरफ़राज है,
और तुम दिल जलाके बैठे हो।

किन लम्हों पर शिकायत है तुमको,
जो बह गया वक़्त के ख्वालों मे,
मौज ए इश्क़ मे बहालो खुदको,
क्यों रेत पे आंसू सजाते हो।

इतनी शिद्दत भर लो दिल मे अपनी,
के चाहे तो भी ये क़ायनात इंकार ना कर सके।

ये इश्क़ नशा ऐसी है हमनवाज़,
प्याले कि होती तो जिंदगी घूंट घूंट में होता,
ये नशा तो यारों नब्ज़ तक फैलता है,
जिंदगी कही तो होश कही होता है।

ना पियो कोई गुमनाम जहर,
के ना जीने का होश हो,
ना मरने का जोश।

पिलो इश्क़ एक घूंट में दोस्त,
फिर ये दुनिया शहर बेमानी है।

बूत बने बैठे हो आप,
ये शहर ए मुहब्बत है,
और तुम जान छुड़ाके बैठे हो।

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