Strange Poem – कैसी अजीब दास्ताँ है – Humanity Poem in Hindi

Strange Poem – Humanity Poem in Hindi

Strange Poem

कैसी अजीब दास्ताँ है,
इस ज़माने की!
यहाँ लोग अपनों पे कम,
गैरों पे ज़्यादा विश्वास करते हैं।

तरक्की जिसे पहले,
जीवन का उपनाम माना जाता था,
आज जीवन को नष्ट करने,
और आपसी बैर की,
ज़रिया बन गई है।

पहले कहा जाता था कि,
हर सफल व्यक्ति के पीछे,
एक औरत का हाथ होता है,
मगर अब अक्सर यह सुनने में,
आता है कि व्यक्ति के असफलता का कारण ही,
एक औरत होती है,
यह कैसी विडंबना है?

कहते थे कुछ लोग,
नज़रें पढ़ लिया करो,
क्योंकि नज़रे कभी झूठ नहीं कहती!
मगर आज इंसान की नज़रों में,
इंसानियत ही नज़र नहीं आती,
सच्चाई तो, दूर की बात है साहेब!

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