Suicide Poem – यमलोक से खत लिखा – Suicidal Feelings

Suicide Poem – Poem about suicidal feeling

Suicide Poem

यमलोक से खत लिखा,
हूँ बहुत मैं चाव से.
ख़ुदकुशी की राह पकड़ी,
मैं अपनों के घाव से।

सुनो देश और दुनिया वालो!
बात एक बतलाती हूँ,
भारत की बेटी बन नहीँ पाई,
इसलिए कवित्त एक बन जाती हूँ।

थी बहुत मजबूर इतना,
अपने दाव और घाव से,
इसलिए जी नहीँ सकी,
मैं बहुत ही चाव से।

सुनो अब ये दुनिया वालो !
बहुत दर्द में कह रही हूँ,
अपनी कमजोरी के चलते,
साँसें अंतिम ले रही हूँ।

थी बहुत मजबूर इतना,
समझा नहीं सकी मैं आप,
यदि स्वयं समझ गए होते,
तो नहीँ करती मैं ऐसा पाप।

है बहुत सत्य ये कहना,
जान हत मैं दे चुकी हूँ,
गुमनामी कहो या बुजदिली,
सीख तुम्हें कुछ दे रही हूँ।

सीख सको तो सीख लो,
तुम मेरे इस दबाव से,
वरना फिर पछताओगे,
तुम स्वयं के घाव से।

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