Sunshine Poem – रोज़ मैं ये धुप को छत – Love Poem for Her

Sunshine Poem – Love Poem for Her

Sunshine Poem

रोज़ मैं ये धुप को छत पे तेरे बाल सुखाते देखता हूँ,
किस्मतवाला इसी बहाने तेरे बालों मे बादल संजोता है।

किस्मत कुछ इस हवाओं कि कम नही,
तेरे बालो मे झूले सजाता है।

चाँद कैसे पीछे रहता,
वो तो सारा चांदनी जैसे तुझपे लुटा ता है।

ये धुप ये हवा ये चाँद के किस्मत,
हर रोज़ एक वो छत और एक में आपस मे हिसाब करते है।

छत बोले मैं किस्मतवाला सबसे ज्यादा,
हर रोज़ उसकी कदमे चूमता हूँ,
मैं कहता सही है मगर,
मैं भी कहा कुछ खोता हूँ।

मेरे आँखों में उसकी सूरत देखले,
मेरे धड़कनो मे उसकी आहट सुन ले,
मेरे रूह तक उसकी बेताबी मेहसूस कर,
मेरे साँसों मे उसकी महक देखले।

तू करीब है उसके पर दूर में भी नही हूँ,
मेरे हर लम्हा हर वक़्त उसका होता है,
मुझे धुप से चाँद से या हवाओं से कोई शिकवा नही,
मेरे हर ख्वाब कि जुबानी वो रहती है।

मेरे एहसास के आईने मे सूरत उनकी,
दिल नब्ज़ तक छायी रहती है,
दर्मियां बस लफ्ज़ो कि है,
मेरे दिल के करीब ही रहती है।

रोज़ मैं ये धुप को छत पे तेरे बाल सुखाते देखता हूँ।

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