Tag: Ghazal Poetry

Excuse Poem – खुबसूरत सी कोई बहाना – Ghazal Poem About Love

Excuse Poem – Ghazal Poem About Love Excuse Poem खुबसूरत सी कोई बहाना दे दो.. मेरे जिन्दगी एक जमाना दे दो… फुरसत में लम्हे यूँ बहता है.. इन लम्हों को एक ठिकाना दे दो.. बेहिसाब दिल खर्च यूँ हो रहा है.. बदनामी सही एक नाम तो दे दो.. बेजुबान इश्क यहाँ पल पल दम तोड़े..

Dil Ki Baat Poetry – दिल की बात है मेरी मर्ज़ी – Ghazal Poem

Dil Ki Baat Poetry – Ghazal Poem Dil Ki Baat Poetry दिल की बात है मेरी मर्ज़ी तो नही चलती, एहसान इतना करदे , के धडकनों की भी सुन लेना…. लोगों का क्या है, आँखों पे मुकद्दमे चलाएंगे, हमने तो पिली जिन्दगी इनसे, जमाना कहेंगे तो क्या, तू उनका मत सुन ना…… बेसबब इलज़ाम लगा

Ghazal Poem About Love – शाम ढले जब – Ghazal Poem in Hindi

Ghazal Poem About Love – Ghazal Poem in Hindi Ghazal Poem About Love शाम ढले जब चाँद चुपके से बोले आना मेरे गली ओ बाँके आना मेरे गली। रात बरे जब तारें चुपके से बोले आ खेलेंगे आँखमिचोली ओ बाँके खेलेंगे आँखमिचोली। देख के पिया बोले साजना आ चल आसमां तले चाँद बस रात भर

Do Not Poem – ना जाना यूँ खामोश रहके – Ghazal Poem

Do Not Poem – Ghazal Poem Do Not Poem ना  जाना यूँ खामोश रहके अलबिदा तो कह के जा रह गए जो अधूरे सपने कल के वादा करके जा। ना जाना यूँ…। तेरे बिन लम्हों का एहसान होगा तेरे आने तक ना रुके कभी, तेरे बिन ये साँसे क़र्ज़ होगा तेरे आने तक ना थमे

Book Poem – खुली किताब हूँ – Ghazal Poem

Book Poem – Ghazal Poem Book Poem खुली किताब हूँ कुछ पन्नो पर यूँ एतबार ना कर कहानी अब भी बाकी है यार और कुछ आगे तो पड़। कुछ रौशनी कम है सच्चाई नही अँधेरे में झूट कहा सच बोलती है !! ये रात फीकी पर जाने दे धुप की सच मीठी होती है… ना

Aaina Poetry – अब घर से सारे आईने मैंने निकाल – Ghazal Poem

Aaina Poetry – Ghazal Poem Aaina Poetry अब घर से सारे आईने मैंने निकाल दिए तन्हा हूँ तनहा रहू ख्वाहिसे निकाल दिए. अब घर से… खिड़की बहुत थे घर में सारे बंद कर लिए रौशनी से नाता तोड़ ली अँधेरे में बह लिए.. अब घर से… खामोश घर दीवारे अब खुद को सह लिए आवाजे

Water Poem – पानी का रंग नीला परा है – Ghazal Poem in Hindi

Water Poem – Ghazal Poem in Hindi Water Poem पानी का रंग नीला परा है, जहर ये नीला कम लगता है, अब किसको कोसु कौन गबाह है, ये प्यास पुराना आच्छा लगता है। पानी का रंग…… उची मंजिल पत्थर के सड़के, हरियाली अब फीका लगता है, दिन लम्बी है रात छोटी अब, गुजरा कल कहानी

Khush Poetry – कभी तो मुझसे बाते कर Ghazal Poem About Love

Khush Poetry – Ghazal Poem About Love Khush Poetry कभी तो मुझसे बाते कर लेना, खामोश हूँ गर आँखों से कह देना। मैं परेशां नही, बस गम है की कोई गम नही !! मैं हैरान नही, बस खुश हूँ, इतना है की कुछ कम नही !! तुमने कहा था कभी के मुझे होश नही, मदहोश

Gum Poem – कुछ तो कही गुम सा है – Ghazal Poem About Love

Gum Poem – Ghazal Poem About Love Gum Poem कुछ तो कही गुम सा है, पास है हम तुम मगर, एक दरमियां सा है… कभी खास था, कभी सांस था, नासाज़ अब दिल यहाँ, एक बर्फ सा है। कुछ तो कही गुम सा है…. साल गुजरे है कितने, एक अमाबस ना गुजरा, ख़ामोशी जम गयी

Eyes Poem – आँखों में बादल अपना – Ghazal Poem in Hindi

Eyes Poem – Ghazal Poem in Hindi Eyes Poem आँखों में बादल अपना, बारिश कोई मुजरिम तो नही। चेहरे पर घटा यूँ जो छाए, सावन कोई मुलाजिम तो नही। दर्द के बहाने अजीब है, अपना रस्ता ढूढ़ ही लेते, कोई तो ये बताये, ये रिश्ता पुराना क्या है। आँखों में बादल अपना, बारिश कोई मुजरिम

Wind Poem – सनसनाती हवा – Ghazal Poem in Hindi

Wind Poem – Ghazal Poem in Hindi Wind Poem सनसनाती हवा, खिलखिलाती फिजा, सुनो क्या कह रही है, कोई करीब आ रही है। खिड़की में से चाँद हमसे कुछ कहा, जो छुया चाँदनी, मदहोश ये दिल हुआ, देख ये शमा गा रही है, कोई करीब आ रही है। जुगनुओ की बाराती, सितारे झिलमिलाती, गुम होश

Honey Poem – चेहरे पे कल चाँद शहद – Ghazal Poem About Love

Honey Poem – Ghazal Poem About Love Honey Poem चेहरे पे कल चाँद शहद था जिसके, आज खंजर मे खून उतरा है। नक़ाब के पीछे मत भागो यारों, दो आने मे बाज़ार में बिकते। प्यार अब ख़जाना जैसा लगता है, जिंदगी भर ढूंढो हाथ नही लगते। साजिश के मुस्कराहट हर होंटो पे है, जरा पीछे

Tasveer Poetry – तेरा तस्वीर ना मिट सका – Ghazal Poem

Tasveer Poetry – Ghazal Poem Tasveer Poetry तेरा तस्वीर ना मिट सका कितने बरसात के बाद धूल गए हज़ारों आसमां बस एक बरसात के बाद। कोई बतायो के हुजूर को क्यों गुमान इतना हमने तो टूट कर चाहा उनको चांदनी जितना। क्या खबर था के आईने तक परछाई बदलते हमने तो तेरे रस्ते तक ना

Yawn Poem – शाम को अंगराई लेते देख – Evening Poem

Yawn Poem – Evening Poem Yawn Poem शाम को अंगराई लेते देख एक खटाई सा छा गया क्या एक सूरज पे इतना टूटना ये चाँद भी तो कोई बला है ! रात को रानी बनाती बिंदिया बनके हर छत पे सेहरा सजाती चांदनी लुटाके। कभी पिके देखो चांदके ठंडाई सर्द रातों कि नरमाहट महसूस करके

Ghazal Lyrics – चलो फिर आज मैखाने – Ghazal Poetry in Hindi

Ghazal Lyrics – Ghazal Poetry in Hindi Ghazal Lyrics चलो फिर आज मैखाने ये शहर को डुबोके आये ये दिल तो नाचीज़ है यारों इसे कुछ भिगोके आये चलो फिर आज मैखाने……. जले तेरे घर यहाँ ए इश्क़ वफ़ा के खून बहते जाये कोई नब्ज़ को क्यों काटे चलो पिए पिलाते जाये चलो फिर आज

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