Tag: Hindi Poetry

Habit Poem – आदत है उसकी – Poem on Human and Nature

Habit Poem – Poem on Human and Nature Habit Poem आदत है उसकी, बार बार टोकना हर बात पर, और मेरी, ना सुनते हुए सुन लेना. अब तो आँखों से भी सुन लेता हूँ, बीस साल हो गए कभी दहलीज़ नहीं लाँघि, जहन के तह तक घुल चुकी है वो. सुबह से शाम , शाम

Umeed Poetry – उम्मीद – Poem on Hope and Faith

Umeed Poetry – Poem on Hope and Faith Umeed Poetry जब किसिपे कोई उम्मीद करना, हाथ से दिल अपना संभाले रखना, टूटता है जो हज़ार टुकड़ो में, हर एक टुकड़े का तुम हिसाब रखना, जब किसिपे कोई उम्मीद करना. जब किसी हसीं चेहरे से भरोसा करना, अपने दामन में आंसू कुछ छुपाये रखना, बिखरता है

Inscrutable Poem – बोधहीन – Humanity Poem in Hindi

Inscrutable Poem – Humanity Poem in Hindi Inscrutable Poem मैं तो बोधहीन एक साधारण मनुस्य हूँ, तू तो संन्यासी है, तू क्यों स्वर्ग के लिए लालाइत है. मैं तो जर्जरित हूँ, लोभ काम क्रोध मोह माया से, तू तो संन्यासी है, तू क्यों इस संसार में मोहित है. मैं ईर्षा अग्नि में जल रहा हूँ,

Today Poem – आज भी है – Poem on Hope in Hindi

Today Poem – Poem on Hope in Hindi Today Poem कभी तो फिर से बीस को पहुँचूँगा, तेरी हंसी की खनक आज भी है, कभी तो फिर से दिल को जियूँगा, तेरी धड़कनो की स्वाद आज भी है. ए वक़्त तुझे घमंड किस बात पे है, मुझे उसका इंतजार तो आज भी है, मेरी झुर्रियों

Moments Poem – बीती लम्हों पर अब ऐतबार – Ghazal Poem

Moments Poem – Ghazal Poem Moments Poem कितनी हसरते बहाना ढूढती है, नींद टूट जाये फिर भी ख्वाब बुनती है. कितने अरमानों के महल बनते बिगड़ ते है, फिर भी उम्मीदों के सितारे जलते है. कोई कैसे सुबह को इलज़ाम दे पाए, रात के जले ख्वाब तो येही खिलते है. बीती लम्हों पर अब ऐतबार

Sawan Poetry – सावन का महिना चार – Ghazal Poem About Love

Sawan Poetry – Ghazal Poem About Love Sawan Poetry सावन का महिना चार यहाँ, आती नही क्यों बार बार यहाँ, गीली तकिये नींद भिगोये, सूखे दिल मेरा यार यहाँ, आती नही क्यों बार बार यहाँ. सावन का महिना चार यहाँ…. ऐसे तो आँखों में रहती, जाने ये कौन से बादल सहती, रिश्ता पुराना लगता है

Zindagi Poem – कुछ तो हँसके कह गयी – Ghazal Poem About Love

Zindagi Poem – Ghazal Poem About Love Zindagi Poem कुछ तो हँसके कह गयी, कुछ तो हसाके, ये जिन्दगी तू जिन्दादिली की बात कर गयी, कुछ अश्क बहाके तेरे किस्से पुराने नए लगते है, तेरे वादे हमेशा सच्चे लगते है, तेरे धुन में अब तक नाच रहा हूँ, तू एक जिन्दगी हजारों कम है…!! कौन

Shisha Poem – शीशे की शहर, शीशा दिल – Ghazal Poem Love

Shisha Poem – Ghazal Poem Love Shisha Poem शीशे की शहर, शीशा दिल है, पत्थर से डरे लोग रहते है, ये गुस्ताख दिल पर न माने, फिर से मुहब्बत कर जाये….. शीशे की शहर, शीशा दिल है…….. नफरत के शहर, जहर उगले है, जहर से चुभे मंजर रहता है, नादाँ ये दिल है क्या जाने,

Say Poem – कभी हिन्दू कहते हो – Ghazal Poem in Hindi

Say Poem – Ghazal Poem in Hindi Say Poem कभी हिन्दू कहते हो, कभी मुसलमान कहते हो, और कभी इंसान को तुम, भगवान कहते हो…..!!!! कहने को तुम आजाद कहते हो, कैद हो तुम फिर भी कहते हो, रंगों की होली रोंगोली कहते हो, और लहू निकले तो, सफ़ेद कहते हो….. भाई को अब दुश्मन

Old Is Gold Poem – चाँद के दाग पुराने अच्छे – Ghazal Poem

Old Is Gold Poem – Ghazal Poem Old Is Gold Poem चाँद के दाग पुराने अच्छे, दिल तू भी बेदाग़ नही है…. खामोश अब ये रात ही अच्छे, दिल तू क्यों खामोश नही है…… चाँद के दाग पुराने अच्छे…. ये बादल तू क्यों ठहरा है, कौन है जिसका राह तके है, क्यों तेरा फासले बड़े

Boat Poem – एक अलबेला नाव मझधार मे – Ghazal Poem

Boat Poem – Ghazal Poem Boat Poem एक अलबेला नाव मझधार में, देख किनारा चुपके रोये….. बहाव की रुख न समझा था, अब दूर किनारा चुपके रोये….. एक अलबेला नाव मझधार में, कितने शावन गुजरे गिला मन, कितने अरमां दम तोड़े है, अब पतझड़ जीवन, सूखे दिल है, देख पपीहा चुपके रोये……. एक अलबेला नाव

Excuse Poem – खुबसूरत सी कोई बहाना – Ghazal Poem About Love

Excuse Poem – Ghazal Poem About Love Excuse Poem खुबसूरत सी कोई बहाना दे दो.. मेरे जिन्दगी एक जमाना दे दो… फुरसत में लम्हे यूँ बहता है.. इन लम्हों को एक ठिकाना दे दो.. बेहिसाब दिल खर्च यूँ हो रहा है.. बदनामी सही एक नाम तो दे दो.. बेजुबान इश्क यहाँ पल पल दम तोड़े..

Dil Ki Baat Poetry – दिल की बात है मेरी मर्ज़ी – Ghazal Poem

Dil Ki Baat Poetry – Ghazal Poem Dil Ki Baat Poetry दिल की बात है मेरी मर्ज़ी तो नही चलती, एहसान इतना करदे , के धडकनों की भी सुन लेना…. लोगों का क्या है, आँखों पे मुकद्दमे चलाएंगे, हमने तो पिली जिन्दगी इनसे, जमाना कहेंगे तो क्या, तू उनका मत सुन ना…… बेसबब इलज़ाम लगा

Ghazal Poem About Love – शाम ढले जब – Ghazal Poem in Hindi

Ghazal Poem About Love – Ghazal Poem in Hindi Ghazal Poem About Love शाम ढले जब चाँद चुपके से बोले आना मेरे गली ओ बाँके आना मेरे गली। रात बरे जब तारें चुपके से बोले आ खेलेंगे आँखमिचोली ओ बाँके खेलेंगे आँखमिचोली। देख के पिया बोले साजना आ चल आसमां तले चाँद बस रात भर

Do Not Poem – ना जाना यूँ खामोश रहके – Ghazal Poem

Do Not Poem – Ghazal Poem Do Not Poem ना  जाना यूँ खामोश रहके अलबिदा तो कह के जा रह गए जो अधूरे सपने कल के वादा करके जा। ना जाना यूँ…। तेरे बिन लम्हों का एहसान होगा तेरे आने तक ना रुके कभी, तेरे बिन ये साँसे क़र्ज़ होगा तेरे आने तक ना थमे

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