Tag: Hope Poetry

Umeed Poetry – उम्मीद – Poem on Hope and Faith

Umeed Poetry – Poem on Hope and Faith Umeed Poetry जब किसिपे कोई उम्मीद करना, हाथ से दिल अपना संभाले रखना, टूटता है जो हज़ार टुकड़ो में, हर एक टुकड़े का तुम हिसाब रखना, जब किसिपे कोई उम्मीद करना. जब किसी हसीं चेहरे से भरोसा करना, अपने दामन में आंसू कुछ छुपाये रखना, बिखरता है

Poem About Hope And Faith – कही ना कही – Hope Poem in Hindi

Poem About Hope And Faith – Hope Poem in Hindi Poem About Hope And Faith कही ना कही कोई ऐसा फ़लक होगा जहाँ सितारें तो जलेंगे पर वो अपना होगा। कही ना कही……. कब कहा ना फिक्र होगा तेरे हाथों पर बादल सफा होगा पलट लेना काले जो मंडराएं तो अब कोई बरसात में ये

Poetry Hope Inspiration – हर शाम हर बार – Hope Poetry

Poetry Hope Inspiration – Hope Poetry Poetry Hope Inspiration हर शाम हर बार मैं और सिर्फ़ मैं सूरज से वादा करता हूं कल फिर मिलूंगा इस टीले पर आँखों मे सच्चाई लेके। दिन भर टूटूंगा गिरूंगा पसीने मे लथपथ रहकर सच कि हाथ नही छोड़ूंगा थक कर चूर होकर भि मिलूंगा तुझसे दिल मे हौशला

उम्मीद Poem – तेरे लौट आने की उम्मीद – Poem on Hope

उम्मीद Poem – Poem on Hope उम्मीद Poem तेरे लौट आने की उम्मीद, मुझमें अभी बाकी है, यूँ न जाओ सनम तुम, रात अभी बाकी है। आजा मैं तेरी जुल्फ़ों को सवाँर दूँ, बाहों में भर लूँ तुझे, दुनिया की प्यार दूँ, चुप रहने को न कहो तुम, बात अभी बाकी है। लबों को चूम

Poem on Hope in Hindi – कोई नही – Poem on Hope and Faith

Poem on Hope in Hindi – Poem on Hope and Faith Poem on Hope in Hindi ये शहर है अपना मगर जानता कोई नही शक्लें तमाम रहगुज़र पहचानता कोई नही भटक रही ज़िन्दगी मन्ज़िल की खोज में कारवां मिलते सफर पर रास्ता कोई नही इलज़ाम किसी और पर अपने गुनाह का करते यही सब हैं

Hope Poem – काश तुम – Short Poem About Hope

Hope Poem – Short Poem Love Hope Poem दर्द उभरकर आह बना, दिल भी सहमा रुख़सत पर ख़ामोशी से अश्क़ गिरे थे, हाथों में खुले ख़त पर खालीपन बिखर गया है, मन के सूने आँगन में बार बार तन्हाई कहती, कितना सुख था बन्धन में जीवन की आपा धापी में, सदियों पिछड़ गये हम मंज़िल

Wish Poem – ख्वाहिशें बहुत हैं – Poem on Hope and Wish

Wish Poem – Poem on Hope and Wish Wish Poem नादान दिल धड़कने की ख्वाहिशें बहुत हैं मोहब्बत के सफ़र में आज़माइशें बहुत हैं अपना उसे बनाने का इक रोज़ वक़्त आएगा उम्मीद के दामन में अभी गुंज़ाइशें बहुत हैं हर दौर में ख़ुदा सा कोई चढ़ता सलीब पर सियासत में साज़िशों की पैदाइशें बहुत

Poem Hope – वही समां लौट आए – Hope Poem About Life

Poem Hope – Hope Poem About Life Poem Hope काश कि फिर से वही समां लौट आए, कि सितारों में से मेरी माँ लौट आए।। मुझे साफ नज़र आने लगा है तेरा फरेब, काश कि मेरी आँखों में धुआँ लौट आए।। एक ग़ालिब हुआ था, बाब-ए-सुखन था, काश कि फिर से वही ज़ुबाँ लौट आए।।

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