Tag: Human Poetry

Habit Poem – आदत है उसकी – Poem on Human and Nature

Habit Poem – Poem on Human and Nature Habit Poem आदत है उसकी, बार बार टोकना हर बात पर, और मेरी, ना सुनते हुए सुन लेना. अब तो आँखों से भी सुन लेता हूँ, बीस साल हो गए कभी दहलीज़ नहीं लाँघि, जहन के तह तक घुल चुकी है वो. सुबह से शाम , शाम

Society Poem – समाज में अपनी क़द्र पानी – Human Values Poem

Society Poem – Human Values Poem Society Poem समाज में अपनी क़द्र पानी है क्या औकात तुम्हारी ये पहले जानो कितने पड़े लिखे हो तुम कितने डिग्रीयो से सम्मानित हो तुम। बंगला गाड़ी कितने है तुम्हारे किस जमीं से आये हो तुम कौन से मंडली में उठना बैठना कितने महफ़िल के शान हो तुम। कितने

Narrow Thinking Poem – संकुचित सोच – Humanity Poem in Hindi

Narrow Thinking Poem – Humanity Poem in Hindi Narrow Thinking Poem लोगों की संकुचित सोच का परिणाम, हमने देखा है। मानव से ही मानवता को शर्मसार होते, हमने देखा है। अब हमसे दीन-दुखियों की, बात न करो साहेब, आवास के नाम पे, खुद का महल बनाते, हमने देखा है। आज जनता का हमदर्द आख़िर है

Human Being Poem – मानवों ने मानवता को – Humanity Poem

Human Being Poem – Humanity Poem in Hindi Human Being Poem मानवों ने मानवता को, शर्मसार कर दिया है। हर हद की हद ज़्यादा, सीमा पार कर दिया है। डर लगने लगा है, मुझे तरक्की से बहोत, क्योंकि इसने ही इंसानों को, खूंखार कर दिया है। इस युग में सौहार्दता, अच्छी नहीं लगती। प्रेमभाव, परोपकार,

Apne Poetry – सुख में जितने अपने होते – Poem on Truth of Life

Apne Poetry – Poem on Truth of Life Apne Poetry सुख में जितने अपने होते, दुःख में सपने हो जाते हैं, जो, दुःख में साथ निभाते हैं, अक्सर वे अपने हो जाते हैं। दुःख से तुम घबरा कर प्यार, भाग खड़ा मत होना! जीवन की परिभाषा है दुःख, इससे कभी न डरना। दुःख ही तो

Human Being Poem – परवरदिगार निकला – Hindi poem on Humanity

Human Being Poem – Hindi poem on Humanity Human Being Poem आया था बन के तूफ़ाँ लेकिन ग़ुबार निकला कुछ ऐसा दिलफ़रेब सा अपना प्यार निकला कश्ती किया हवाले जिसे नाख़ुदा समझ कर वो शख़्स समन्दर की लहरों का यार निकला. हमने रखी बचाकर थी दिल में जिसकी पूँजी दौलत नही थी अपनी वह तो

Human Poem – पहचान हो तो बताना – Hindi language Poem

Human Poem – Hindi language Poem Human Poem एक टुकड़ा भी गैरों को खिला कर देखो, ये ख़ुशी क्या है, पैसों को हटा कर देखो। तुझको दौलत की आरज़ू ने खरीदा है, प्यार की खुशबू को होंठों से लगा कर देखो। हर ज़ुबाँ पर तो नफ़रत के ही किस्से है, अपने ही दिल में मुहब्बत

Humanity Poem – कुछ आग सी है – Poem in Hindi language

Humanity Poem – Poem in Hindi language Humanity Poem कुछ आग सी है मेरे शहर के लोगों में, खुन्नस सी भरी देखी है घर के लोगों में। कुछ दर्द तो बाकी रहा होगा उधर कहीं, जो दर्द आज भी है इधर के लोगों में। उतना नशा नहीं रखते हैं शब के लोग, जितना नशा होता

Humanity Poem – कोई तीखा सा पकवान हो तो – Tell Me a Poem

Humanity Poem – Tell Me a Poem Humanity Poem कोई तीखा सा पकवान हो तो बताना, कभी तुम्हारे यहां जलपान हो तो बताना। आदमी आदमी का यहां कातिल है, आदमियत से कोई अनजान हो तो बताना। ऐ मेरे मालिक मैं तेरे जिस्म का टुकड़ा हूँ, मेरी अपनी कोई पहचान हो तो बताना। अपने ही घर,

Human Nature Poem – क्या जानना नहीं चाहोगे – Hindi Kavita

Human Nature Poem – Poem on Human and Nature Human Nature Poem क्या जानना नहीं चाहोगे? मैं कहाँ, किस हाल में हूँ, जीवित भी हूँ या फिर मर-खप गई हूँ। शायद तुम नहीं जानना चाहोगे। तुम तो पुरुष रूप में जन्म पाकर लिप्त हो मौके-बेमौके अपनी पौरुषता के एकाकी स्वांग रचने में। ओ पुरुष, मगर

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