Tag: Relationship Poetry

Dushman Poetry – ये रब कुछ और दो चार – Relationship Poem

Dushman Poetry – Relationship Poem Dushman Poetry ये रब कुछ और दो चार दुश्मन दे दे ऐसे भी दोस्तों कि कमी सी है ये दुश्मन ही है हमें याद करते है वरना दोस्त किस काम के। ख़ुशी नही चाहते कुछ गम दे दे वरना लोग कहेंगे यूँही चेहरे बनाते है। कोई दरकार नही दौलत कि

Relationship Poem – कोई कितना भी – Poem About Relationship

Relationship Poem – Poem About Relationship Relationship Poem कोई कितना भी हैरान हो रिश्ते बिछड़ते है कोई कितना भी परेशां हो ग़म बरसते है। ना कोसो किसी मुसाफिर को यूँही चलते हुए ना टोको कोई मुहाजिर को घर से निकलते हुए। कोई कितना……. कौन अपना था कल तक कभी जाहिर ना करना कौन कातिल था

Poem on Relationship in Hindi – तलाश – Relationship Poem

Poem on Relationship in Hindi – Relationship Poem Poem on Relationship in Hindi न मजबूरियाँ मज़बूरी थीं ना ज़रूरतें ही ज़रूरी थीं उस अनाम रिश्ते में कभी रह पायी न कोई दूरी थी न अधिकार को था सहना ना कर्तव्य को था कहना लगता था बोल कर भी हर बार चुप सा रहना वो गालियाँ

Poem on Relationship in Hindi – कितनी बार – Short Hindi Poem

Poem on Relationship in Hindi – Short Hindi Poem Poem on Relationship in Hindi कितनी बार चाँदनी लेकर चाँद खड़ा था राहों में कितनी बार पुकार तुमको भरकर अपनी आहों में कितनी बार बंद आँखों ने पाया तुम्हें निगाहों में कितनी बार कहा दिल ने भर लो मुझको बाँहों में

Heart Relationships – Relationship Poem – Hindi Poetry

Some Heart Relationships Poem in Hindi Heart Relationships कुछ दिल के रिश्ते, कुछ खून के है। दोनो साथ चलेगे ऊम्र भर मेरे।। दिल के रिश्ते खुद से जोडे, खुदाई रूप है, खून का रिश्ता पाना। विष्वास भरे है दोनो हि,दोनो का अपना रौब ठिकाना।। कमजोर होता है जितना, उतना हि मजबूत भी। खो देते है

Brother Poem – भाई – Poem on Brother in Hindi Language

Poem on Brother in Hindi Language – Brother Poem Brother Poem मुझे एक भाई बड़ा ही प्यारा मिला अंजाना सा रिश्ता बड़ा न्यारा लगा। थी बहुत मायूस अपनों की हरकतों से बस परायों से बड़ा दिल को सहारा मिला। यूं कहने को तो मेरे भी अपने भाई हैं लेकिन हर फर्ज से वह नाकारा मिला।

Saat Phere Saat Vachan – शादी की सात रसमे, सात कसमे – Poem

Saat Phere Saat Vachan – Hindi Poem Saat Phere Saat Vachan इस नए रिश्ते की शुरुआत चलो करते हे कुछ ख़ास , मांगते हे कुछ कसमे कुछ रसमे , बीते दिनों के कुछ कहे अनकहे से नगमे ,,,,, क्योकि पकड़ा हे इस जनम में मेरा हाथ , तो क्या दोगे मेरा साथ !!!!! मांगी हे

Poem Relationship – हैं रिश्ते यहां सभी – Relationship Poem

Poem Relationship in Hindi Poem Relationship हैं रिश्ते यहां सभी स्वार्थ के, लिए देख मैने संसार के। बच कर निकल न पाए, हों जैसे फंदे ये शिकार के। बिन स्वार्थ के यहां किसने, जिंदगी के जप किए। घूमते हैं वृद्ध ही क्यों, हाथ में लाठी लिए। है कौन ऐसा इस जंग में, जिसने नही आंसू

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